त्योहारी मौसम के दौरान कार खरीदने के साथ काफी एक्सेसरीज भी मिलती है। मगर कार के किन एक्सेसरीज को लेना सही रहेगा। साथ ही एक्सेसरीज के लिए कई बार अतिरिक्त पैसे भी देने पड़ते हैं। कार एक्सेसरीज में कार की कवर्स, कार परफ्यूम आदि। यह कुछ ऐसी एक्सेसरीज होती हैं, जिन्हें लेना जरूरी नहीं होता है।
आपको बता दें कि कार के शीर्ष वेरिएंट में कई सारे स्पीकर्स, बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम, रियर व्यू, सनरुफ व्यू, रिवर्स कैमरा और कैमरा सेंसर्स आदि। यह सभी फीचर्स कार के लिए जरूरी हो सकते हैं। अगर आप इन्हें ऑफ्टरमार्केट से खरीद रहे हैं तो इसका ध्यान रखें कि यह सभी फीचर्स और एक्सेसरीज किसी अच्छे ब्रांड के होने चाहिए। अगर आप लोकल ब्रांड की एक्सेसरीज खरीदेंगे तो यह कार की क्षमता पर बुरा असर डाल सकते हैं।
ऑफटरमार्केट एक्सेसरीज ले रहे हैं तो कार के लिए अलॉय व्हील का चुनाव कर सकते हैं। हालांकि, अक्सर अलॉय व्हील्स बेस या फिर एंट्री लेवल कार के लिए आते हैं। यहां पर आपको एक बात का ध्यान रखना है कि अलॉय व्हील्स का साइज और बॉडी कार के साथ मिलनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो फिर कार की माइलेज और इंजन की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं, अगर कार के लिए सनरुफ लेने की सोच रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि नई कार का सनरुफ और पुरानी कार में सनरुफ की फिटिंग करने में काफी फर्क है। अगर सनरुफ की फिटिंग सही तरीके से नहीं होती है तो फिर कार को नुकसान हो सकता है। साथ ही ट्रैफिक पुलिस कार का जुर्माना भी ले सकती है।
ऐसे में नई कार का शीर्ष वेरियंट खरीदने में या फिर ऑफ्टरमार्केट से कार में नई एक्सेसरीज लगवाने में काफी अंतर है। हालांकि, इन दोनों का चुनाव करने में कार के फीचर्स में फर्क हो सकता है, जिससे कार की माइलेज या फिर कार की परफॉर्मेस पर असर पड़ता है।