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Trump Tariffs: ट्रंप के 25% टैरिफ लागू होने से भारतीय कंपनियों की मुश्किलें बढ़ीं, ऑटो कंपोनेंट निर्यात पर असर

Fri, 01 Aug 2025 04:14 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

1 अगस्त 2025 से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 25 प्रतिशत का नया आयात शुल्क (टैरिफ) लागू हो गया है, जिससे भारत के ऑटो पार्ट्स निर्यात पर सीधा असर पड़ा है।
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कार प्लांट - फोटो : एआई
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विस्तार
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1 अगस्त 2025 से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 25 प्रतिशत का नया आयात शुल्क (टैरिफ) लागू हो गया है, जिससे भारत के ऑटो पार्ट्स निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। यह फैसला भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले कई सामानों पर लागू हुआ है। और इससे भारतीय कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति और सप्लाई चेन दोनों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिका भारत को रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए एक अलग तरह की "सजा" (जुर्माना) की बात भी कर रहा है, जिससे कीमतों में और भी अस्थिरता आ सकती है।
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अमेरिका को जाता है भारत का एक बड़ा ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट
भारत का ऑटो कंपोनेंट सेक्टर इस समय 111 अरब डॉलर का है और वित्त वर्ष 2025 में इसमें से 9.5 अरब डॉलर, यानी करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले अमेरिका को निर्यात की गई। वहीं इसके उलट, अमेरिका से भारत को होने वाला आयात महज 7 प्रतिशत के आसपास है। यानी साफ है कि अमेरिका भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है।

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भारतीय कंपनियों की लागत प्रतिस्पर्धा पर भी असर
नई टैरिफ नीति से अब भारतीय ऑटो पार्ट्स की कीमतें बढ़ेंगी और जो कीमत को लेकर प्रतिस्पर्धा भारत के पास थी, वह भी खत्म हो सकती है। खास बात यह है कि भारत पर जहां 25 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है, वहीं जापान पर सिर्फ 15 प्रतिशत, वियतनाम पर 20 प्रतिशत और इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत का ही टैक्स है। यानी भारत अब बाकी एशियाई देशों की तुलना में महंगा पड़ सकता है।

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मैक्सिको और कनाडा को नहीं कोई झटका
अमेरिका के सबसे बड़े ऑटो कंपोनेंट सप्लायर्स मैक्सिको और कनाडा हैं, जिन्हें USMCA (US-Mexico-Canada Agreement) (यूएस मेक्सिको कनाडा एग्रीमेंट) के तहत इस टैरिफ से छूट मिली हुई है। इस समझौते के अनुसार, अगर वे लोकल प्रोडक्शन (स्थानीय उत्पादन) शर्तें पूरी करते हैं तो उन्हें बिना किसी टैक्स के अमेरिकी बाजार में प्रवेश मिलता रहेगा।

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अमेरिका की सप्लाई चेन में भारत की अहम भूमिका
भारतीय सप्लायर्स अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री की सप्लाई चेन में खास भूमिका निभाते हैं। वे ड्राइवट्रेन, इंजन, चेसिस और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स से जुड़े सिस्टम के लिए जरूरी कंपोनेंट्स की सप्लाई करते हैं। इसके अलावा कई कंपनियां सॉफ्टवेयर सिस्टम भी भारत से ही मंगवाती हैं।

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भारतीय कंपनियां अब मैक्सिको में निवेश पर कर रही विचार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ भारतीय ऑटो कंपोनेंट कंपनियां अब मैक्सिको जैसे टैरिफ-फ्री जोन में निवेश करने की योजना बना रही हैं। ताकि अमेरिकी बाजार को सप्लाई देना जारी रखा जा सके। हालांकि अभी ज्यादातर कंपनियां नए निवेश को लेकर सतर्क हैं क्योंकि अभी टैक्स स्ट्रक्चर को लेकर पूरी तस्वीर साफ नहीं है।

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एमएसएमई सेक्टर पर सीधा असर
भारत का ऑटो कंपोनेंट सेक्टर मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) से बना है। ये छोटे उद्योग वैश्विक बाजार में होने वाले ऐसे बदलावों के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। ऐसे में अमेरिका की यह टैरिफ नीति उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ सकती है। 

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