कार सही ढंग से चले, इसके लिए जरूरी है कि गाड़ी में सभी लिक्विड का स्तर पूरा हो। इसमें इंजन ऑयल लेवल, ब्रेक फ्ल्यूड और कार में आने वाला कूलेंट भी शामिल है। नियमित अंतराल पर इनकी जांच करने के साथ-साथ अगर इनका लेवल कम हो गया है तो इन्हें पूरा करना चाहिए। वहीं, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो इससे सीधे तौर पर कार की क्षमता प्रभावित होती है।
इंजन ऑयल का स्तर अगर कम हो गया है तो इंजन में दिए गए रेनस्टार्ट को खोलकर मिनिमम और मैक्सिमम मार्क की जांच करनी चाहिए। कार में इंजन ऑयल डालने के बाद आसपास के हिस्से को साफ करना काफी जरूरी है, वरना इंजन तक लीकेज होने की संभावना बनी रहती है, जिससे हादसा हो सकता है। इससे इंजन की एफिशियंसी बढ़ सकती है।
इंजन कूलेंट का काम इंजन को ओवरहीटिंग से बचाना है। ऐसे में जब भी कूलेंट का स्तर कम हो जाए तो इसके स्तर को पूरा करना चाहिए। इंजन की पूरी क्षमता के लिए 50 फीसदी कूलेंट और 50 फीसदी डिस्टिल्ड वाटर का इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि, यह काम इंजन के ठंडा होने के बाद करना चाहिए, ताकि किसी तरह का हादसा न हो।
कार के अच्छे रखरखाव के लिए ब्रेक फ्ल्यूड का स्तर भी सही होना चाहिए। आपको बता दें कि ब्रेक फ्ल्यूड कार के बोनट में मौजूद होता है। यह आसानी से ड्राइवर साइड पर मिल जाएगा। इस पर मिनिमम और मैक्सिमम का मार्क होता है, ऐसे में इसके बीच में ही ब्रेक फ्ल्यूड का स्तर होना चाहिए। वहीं, अगर ब्रेक फ्ल्यूड का रंग काफी डार्क नजर आता है तो इसे बदलना चाहिए, ताकि कार की क्षमता पर कोई बुरा असर न हो। इसके साथ ही ब्रेक फ्ल्यूड कार की सेफ्टी के लिए काफी अहम माना जाता है।