डेटा की निजता को लेकर दुनिया भर में चिंताएं बढ़ रही हैं। क्योंकि लगभग हर चीज हमारे जीवन से जुड़ी हुई है। वाहन जगत भी इससे अछूता नहीं है। क्योंकि मॉडर्न व्हीकल्स, खासकर कारें कई तरह की कनेक्टेड टेक्नोलॉजी के साथ आती हैं। ये कनेक्टेड टेक्नोलॉजी यह सुनिश्चित करती हैं कि वाहन और उनके निर्माता कार मालिकों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। पारदर्शिता की कमी और कोई ठोस डेटा सुरक्षा तंत्र डेटा उल्लंघन के बारे में चिंताओं को और बढ़ाता है।
टोयोटा, हयूंदै, किआ, मर्सिडीज-बेंज, माजदा, बीएमडब्ल्यू, फॉक्सवैगन, सुबारू और निसान सहित नौ प्रमुख कार निर्माताओं पर अमेरिका में सरकारी अधिकारियों को बिना वारंट मांगे उपभोक्ताओं का लोकेशन डेटा उजागर करने का आरोप लगाया गया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया है कि अमेरिकी सीनेटर उपभोक्ताओं के डेटा की रक्षा के लिए फेडरल ट्रेड कमिशन (एफटीसी) और फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (एफसीसी) दोनों से कड़े कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं। उनके पत्रों से जो खुलासा हुआ है, वह गोपनीयता से जुड़ी गंभीर चिंताओं को जन्म देता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीनेटरों द्वारा एफटीसी और एफसीसी को लिखे गए एक पत्र में, टोयोटा, ह्यूंदै, किआ, मर्सिडीज-बेंज, माजदा, बीएमडब्ल्यू, फॉक्सवैगन, सुबारू और निसान जैसी नौ प्रमुख कार निर्माताओं पर उपभोक्ताओं के लोकेशन डेटा को साझा करने का आरोप लगाया गया है। जिसे बिना वारंट मांगे सरकारी अधिकारियों को निजी जानकारी माना जाता है। इन ऑटो कंपनियों ने कथित तौर पर बिना वारंट के अधिकारियों को लोकेशन डेटा दे दिया है, जो डेटा को सुरक्षित रखने के उनके खुद के स्वैच्छिक वादे का उल्लंघन है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एक अध्ययन में पाया गया है कि 14 कार निर्माण कंपनियों में से केवल फोर्ड, जनरल मोटर्स, स्टेलेंटिस, होंडा और टेस्ला को उपभोक्ताओं का निजी डेटा साझा करने के लिए वारंट की आवश्यकता होती है। साथ ही, इन 14 वाहन निर्माताओं में से केवल टेस्ला ही अपने ग्राहकों को ऐसे सरकारी अनुरोधों के बारे में सूचित करेगी।
एक रिपोर्ट के बीच उपभोक्ताओं के डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा प्रशासन (NHTSA) इस बात पर काम कर रहा है कि वह कारों में रक्त शराब का स्तर परखने वाले और गति सीमा चेतावनी उपकरणों को कैसे अनिवार्य करेगा। बीमा कंपनियों पर पहले से ही उपभोक्ताओं पर दरें बढ़ाने के लिए वाहनों के डेटा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया जा चुका है।