2 जुलाई को सरकार से होगी बैठक
खबरों के मुताबिक, 2 जुलाई को दिल्ली में एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें ऑटो कंपनियां सीधे परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सामने अपना पक्ष रखेंगी। हालांकि, बिजली मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और SIAM ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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छोटी-बड़ी कारों के लिए अलग नियम बनाने पर भी विरोध
सरकार का प्रस्ताव है कि हल्की और छोटी कारों के लिए अलग मानक हों और भारी गाड़ियों के लिए अलग। लेकिन कंपनियां इसका भी विरोध कर रही हैं। इस तरह के नियम से मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है। जो छोटी कारों के बाजार में मजबूत स्थिति रखती हैं और सीएनजी व हाइब्रिड तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं।
फिर भी SIAM का कहना है कि इंडस्ट्री एकजुट होकर इसका विरोध करेगी। क्योंकि इससे नीति में असंतुलन आ सकता है और कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ मिल सकता है।
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हाइब्रिड, गैस और एथनॉल गाड़ियों को ईवी जैसे प्रोत्साहन की मांग
मारुति और टोयोटा किरलोस्कर जैसे ब्रांड मिलकर यह मांग कर रहे हैं कि हाइब्रिड, एथनॉल मिश्रित ईंधन और गैस से चलने वाली गाड़ियों को भी वैसा ही एमिशन क्रेडिट मिलना चाहिए जैसा इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलता है।
2040 तक पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की बिक्री बंद करने का प्रस्ताव भी सवालों के घेरे में
सरकार की यह भी योजना है कि 2040 तक पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की बिक्री पूरी तरह बंद कर दी जाए। लेकिन SIAM का मानना है कि यह कड़ा कदम निवेश के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी 2035 तक पेट्रोल-डीजल पर बैन को लेकर फिर से विचार किया जा रहा है। जबकि वहां ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर भारत से कहीं बेहतर है।
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भारत की क्लीन व्हीकल नीति की दिशा
सरकार और इंडस्ट्री के बीच चल रही इस चर्चा का असर आने वाले वर्षों की ग्रीन मोबिलिटी नीति पर पड़ेगा। भारत को जलवायु परिवर्तन से निपटना है, लेकिन साथ ही 140 करोड़ लोगों की आर्थिक स्थिति और वाहन की सुलभता का भी ध्यान रखना होगा।
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