विस्तार से कहें तो टर्बो चार्ज्ड इंजन में प्रयोग की जाने वाली तकनीक की मदद से इंजन के भीतर हवा के दबाव को बढ़ा दिया जाता है। दबाव को बढ़ाने से फ्यूल के लिए और भी ज्यादा जगह खाली हो जाती है। जिसका फर्क इंजन की उर्जा पर पड़ता है। जिससे इंजन का परफार्मेस बढ़ जाती है। और यह ज्यादा आउटपुट प्रदान करने लगता है।
इसके अलावा यदि सामान्य इंजन की बात की जाए तो इसमें हवा का दबाव पूरी तरह से वायुमंडलीय दबाव पर निर्भर करता है। जिसका सीधा असर कार की परर्फोमेंस पर पड़ता है। यही कारण है कि एक सामान्य इंजन टर्बो चार्ज्ड इंजन से कम पॉवर जेनरेट करता है।
अब आप यह तो समझ गए है कि कौन-सा इंजन कैसे काम करता है लेकिन क्या आपको पता है कि टर्बो चार्ज्ड इंजन का प्रयोग फ्यूल कंजप्शन को भी बढ़ाता है। वहीं सामान्य इंजन में ऐसा नहीं होता है। हालांकि वाहन कंपनियां इस पर काम कर रही हैं कि कैसे परफार्मेंस के साथ बेहतर माइलेज का भी ध्यान रखा जाए।