भारत में पुरानी कारों की मांग लगातार बढ़ रही है और इस समय सेकंड हैंड कारों यानी प्री-ओन्ड या यूज्ड कारों की बिक्री नई कारों की बिक्री से ज्यादा हो गई है। पुरानी कारों की बिक्री का आंकड़ा नई के मुकाबले करीब दोगुना होने के करीब है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2020 के दौरान भारत में बिकी 2.7 मिलियन (27 लाख) नई कारों की तुलना में लगभग 4.4 मिलियन (44 लाख) पुरानी कारों की बिक्री ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही, पुरानी कारों की बिक्री वर्तमान में नई कारों की बिक्री की तुलना में 1.5 गुना अधिक है, आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ना तय है। इसके अलावा, पुरानी कारों का बाजार का भी साल 2026 तक 50 अरब रूपये का आंकड़ा पार करने का अनुमान है।
इसके अलावा, 4-व्हीलर की मांग का बढ़ना निरंतर जारी रहेगा और ऐसा होना मुख्य रूप से कई कारकों पर आधारित होगा जैसे कि कोरोना जैसा कोई अन्य वायरस फैलने की चिंता, टियर वन और टियर टू शहरों इस मांग को बढ़ाने में व्यापक स्तर पर योगदान देंगे। वहीं कारों के लिए आसान और इंस्टेंट फाइनेंस सुविधाएं भी इस मांग को बढ़ाएंगे और मोबिलिटी की मांग भी लगातार बढ़ रही है जो कि कारों की बिक्री को और तेजी से बढ़ा रही है। इन सबके साथ ही देश के मध्यम वर्ग में एक कार का मालिक बनने की इच्छा, शायद अभी भी कारों की बिक्री बढ़ाने वाले सबसे बड़े कारकों में से एक है।
Car Servicing
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देश में प्री-ओन्ड (सेकंड हैंड) कारों की खरीद-बिक्री बढ़ने का एक अन्य प्रमुख कारण, मुख्य रूप से हाई क्वालिटी और नए-नए मॉडल की कारों को लेकर ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी है जो कि उचित कीमतों पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा ग्राहकों में इंपोर्टेड कारों के लिए बढ़ती प्राथमिकता भी कारों की बिक्री को बढ़ा रही है। वहीं कार डीलरों द्वारा व्यापक सर्विसिंग के बाद पुरानी कारों की बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार कार बेचने से उपभोक्ताओं के बीच एक नई धारणा और विश्वास पैदा कर रही है, क्योंकि उनको काफी कम कीमत में बेहतर कारें मिल रही हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी सेकंड हैंड कार बाजार ऑटोमोटिव सर्विसिंग इंडस्ट्री के विकास को प्रभावित कर रहा है, जिसके वर्ष के आखिर तक 32 मिलियन (3.2 करोड़) अमरीकी डॉलर होने का अनुमान है। ऑटोमोटिव सर्विसिंग स्पेस में काम करने वाली कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल बाजार में आ रही कंसॉलिडेशन, बढ़ता स्केल और फिजिटल सॉल्यूशंस प्रमुख तौर पर प्रोत्साहित करने वाले कारक हैं।
इसके साथ ही टियर 2 और टियर 3 शहरों में जैसे-जैसे पुरानी कारों की मांग बढ़ रही है, ऐसे मल्टी-ब्रांड कार सर्विस वर्कशॉप की मांग भी बढ़ रही है। इसके अलावा टियर 2 और टियर 3 में ज्यादातर यूज्ड कार खरीदार भी बड़े शोरूम में जाने को लेकर संशय में हैं। इसलिए इस बढ़ रहे अंतर को पूरा करने और बढ़ती मांग को पूरी तरह से पूरा करने के लिए एक दिलचस्प नया सेगमेंट है - मल्टी ब्रांड कार सर्विस मार्केट, तेजी से उभर रहा है। इस सेगमेंट में व्हीकल केयर जैसे स्टार्ट-अप सबसे आगे हैं, तेजी से काम हासिल कर रहे हैं और बाजार को व्यवस्थित कर रहे हैं। इस समय कार सर्विस बाजार काफी हद तक असंगठित है और इसे तीन भागों में बांटा गया हैः अपर लेवल, मिडिल लेवल और लोअर लेवल।
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उपरोक्त तीनों पहलुओं के साथ ही, भारत में ऑफ्टर सेल्स कार सर्विस बाजार के भविष्य में पिछले कुछ वर्षों में काफी तेज बदलाव देखा गया है। ग्राहकों की सभी श्रेणियों को ध्यान में रखते हुए, मल्टी ब्रांड कार सर्विस के क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्ट-अप लोकप्रियता और स्वीकृति में बढ़ोतरी का रूझान देख रहे हैं। खास कर मिलेनियल्स तेजी से मल्टी-ब्रांड कार सर्विस प्रोवाइडर्स की तरफ आ रहे हैं। कार में बेस्ट, उपयोग में आसानी और हर तरह की सुविधा जैसे कई उपयोगी कारक इन स्टार्ट-अप को एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ दे रहे हैं और वे और अधिक विस्तार और तेज ग्रोथ के लिए इन फीचर्स और सुविधाओं के साथ ग्राहकों की पहली पसंद बन रहे हैं।
कुल मिलाकर, पिछले वर्षों में टेक्नोलॉजी संचालित मल्टी ब्रांड कार सर्विस प्लेटफॉर्म काफी शानदार काम कर रहे हैं और यहां तक कि उनका भविष्य भी आशाजनक है क्योंकि डेटा एनालिस्ट्स का अनुमान है कि -ऑटो सर्विसिंग क्षेत्र 2025 तक इनको काफी अच्छा बिजनेस देने के लिए तैयार हो रहा है।
मल्टी-ब्रांड कार सर्विस के ट्रेंड्स से पहले, एक कार मालिक के पास अपनी कार सर्विसिंग आवश्यकताओं के मामले में आमतौर पर दो विकल्प होते हैं; या तो कंपनी द्वारा तय सर्विस सेंटर में जाए या पास के किसी स्थानीय गैरेज की तलाश करें और अपनी कार की सर्विस करवाए।
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एक अधिकृत डीलरशिप जेब पर भारी पड़ती है क्योंकि इसमें कई सारी जरूरी रिप्लेसमेंट की आवश्यकता होती है। एक अधिकृत वर्कशॉप का एकमात्र लाभ मन की शांति या अपने आप को तसल्ली देना ही अधिक कहा जा सकता है। और स्थानीय गैरेज का उपयोग करने की अपनी कमियां थीं क्योंकि यह जेब पर हल्का है लेकिन लंबे समय में कार की बेहतरी के लिए अच्छा नहीं है। ये असंगठित स्थानीय गैरेज, जो एक छोटे से बजट पर संचालित होते हैं क्योंकि जब क्वालिटी सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और ग्राहक के साथ पारदर्शिता बनाए रखने की बात आती है, तो वे अक्सर पैसे, समय और क्वालिटी से समझौता करते हैं।
मल्टी-ब्रांड कार सर्विस इन दो दुनियाओं के बेहतर संयोजन से इस कमी को दूर कर रही है। उदाहरण के लिए, मल्टी-ब्रांड कार सर्विस सेंटर कई कार ब्रांडों के लिए सर्विसेज प्रदान करते हैं, और ग्राहकों को रियल ओईएम और ओईएस लचीले स्पेयर पार्ट्स के साथ कार सेवाओं पर वारंटी भी मिलती है। सभी शुल्कों के साथ पूर्ण पारदर्शिता और जिम्मेदारी एक और लाभ है जो ग्राहकों को मिलता है।
Vehicle Care
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व्हीकलकेयर के कोफाउंडर अरविंद वर्मा का कहना है कि "चूंकि पुरानी कारों का बाजार 15 प्रतिशत के वृद्धि प्रतिशत के साथ काफी आशाजनक प्रतीत होता है, इसलिए समान रूप से यूज्ड कार सर्विस बाजार से भी काफी अधिक उम्मीद है। यह आश्चर्य की बात नहीं है कि टियर 2/टियर 3 शहरों में व्हीकल केयर की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है क्योंकि कई लोग टू व्हीलर से 4 व्हीलर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। संख्या की बात करें तो, वर्तमान में औसतन व्हीकल केयर 2000 से अधिक फोर-व्हीलर वाहनों और लगभग 800 दोपहिया वाहनों की सर्विस के प्रति माह ऑर्डर को पूरा कर रहा है।
व्हीकल केयर 2017 में स्थापित की गई। कंपनी का कहना है कि वह दुनिया भर में इंडीपेंडेंट मैकेनिक्स, वर्कशॉप्स, निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, कॉर्पारेट्स, बीमाकर्ताओं और उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का उपयोग करके बेस्ट सर्विसेज और सपोर्ट की पेशकश करके तेजी से ग्रोथ करने के लिए काम कर रहा है। एक अज्ञात सीड इनवेस्टमेंट के साथ स्टार्ट-अप, वर्तमान में पूरे भारत में 50 से ज्यादा शहरों में काम कर रहा है और साल के अंत तक 100 से ज्यादा आउटलेट खोलकर विस्तार की योजना बना रहा है। इस समय कंपनी ने 400 से अधिक गैरेज के साथ नेटवर्क तैयार किया है। कंपनी विस्तार के लिए तैयार है और इस साल 2021 के आखिर तक अपनी मौजूदगी को 100 से ज्यादा शहरों तक बढ़ाने की योजना बना रही है।