केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि चीनी कंपनियों ने हाल के दिनों में भारत में राजमार्ग परियोजनाओं में निवेश नहीं किया है। चीन के साथ सीमा गतिरोध के बीच, गडकरी ने जुलाई 2020 में कहा था कि भारत चीनी कंपनियों को संयुक्त उपक्रमों सहित राजमार्ग परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं देगा।
समाचार एजेंसी पीटीआई द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या चीनी कंपनियों ने हाल के दिनों में भारत की राजमार्ग परियोजनाओं में निवेश किया है, गडकरी ने नकारात्मक जवाब दिया। हालांकि गडकरी ने इस मुद्दे पर विस्तार से कुछ नहीं बताया।
हाल ही में पीटीआई को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा था कि भारत को अपना निर्यात बढ़ाना होगा और आयात कम करना होगा।
अमेरिका स्थित इलेक्ट्रिक कार प्रमुख टेस्ला की भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर आयात शुल्क में कमी की मांग को लेकर पूछे गए एक अन्य सवाल पर, गडकरी ने कहा, "टेस्ला को कोई कर रियायत देने का फैसला वित्त मंत्रालय द्वारा लिया जाएगा।"
सड़क मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, अमेरिकी फर्म ने कहा था कि 40,000 अमेरिकी डालर से ज्यादा के सीमा शुल्क वाले वाहनों पर 110 फीसदी का प्रभावी आयात शुल्क जीरो-एमिशन वाहनों के लिए "निषेधात्मक" है।
टेस्ला ने सरकार से अनुरोध किया है कि सीमा शुल्क मूल्य के बावजूद इलेक्ट्रिक कारों पर टैरिफ को स्टैंडर्ड तौर पर 40 फीसदी तक तय किया जाए, और इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाला 10 फीसदी का सामाजिक कल्याण सरचार्ज वापस लिया जाए।
गडकरी ने कहा कि सरकार संभावित परिवहन ईंधन के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन के बारे में संभावनाओं की तलाश कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि, " 'भविष्य का भारत' बनाने के लिए हमें अपना निर्यात बढ़ाना होगा और आयात कम करना होगा।"