सेमीकंडक्टर्स या चिप की खास बात यह है कि अपने गुणों की वजह से यह कंडक्टर और इंसुलेटर के बीच कहीं होते हैं। आमतौर पर सिलिकॉन से बने इन चिप का इस्तेमाल कार, कंप्यूटर, लैपटॉप, टीवी, स्मार्टफोन, फ्रिज, घरेलू उपकरण और गेमिंग कंसोल जैसे कई उपकरणों में होता है। ऑटोमोबाइल उद्योग में चिप का इस्तेमाल एयरबैग लगाने में मदद करना, एंटरटेनमेंट यूनिट्स और पावर बैकअप कैमरों को कंट्रोल करना होता है।
इन छोटे आकार के चिप किसी भी उपकरण को चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं जैसे डेटा ट्रांसफर और पावर डिस्प्ले। चिप की कमी का सीधा असर कारों, फ्रिज, लैपटाप, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री पर भी पड़ा। तुरंत ऑर्डर करने पर इन चिप का उत्पादन तुरंत बढ़ाना संभव नहीं होता है। इसे बनाना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें महीनों लगते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन (TSMC) दुनिया का सबसे बड़ा चिप निर्माता है। यह Qualcomm, Nivdia और Apple जैसी कंपनियां को चिप बेचती है। चिप निर्माण में इसकी हिस्सेदारी 56 फीसदी है। कोविड महामारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिक्री में बढ़ोतरी की वजह से सेमीकंडक्टर की मांग काफी बढ़ गई। लेकिन सिर्फ कोविड-19 ही एक चिप की कमी की वजह नहीं है।
अमेरिका और चीन के बीच तनाव भी चिप की कमी का एक बहुत बड़ा कारण है। चूंकि कई अमेरिकी कंपनियां चीनी कंपनियों के साथ व्यापार करती हैं। उदाहरण के लिए अमेरिकी चिप निर्माताओं को सप्लाई करने वाली कंपनी Huawei को अमेरिकी सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इसलिए चिप की आपूर्ति को सुचारू करने में लंबा समय लग सकता है।
गार्टनर द्वारा मई में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सभी उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले चिप की कमी साल 2022 की दूसरी तिमाही तक बनी रह सकती है। अगस्त में सेमीकंडक्टर की मांग और डिलीवरी के बीच का अंतर जुलाई में छह हफ्ते की तुलना में बढ़कर 21 हफ्ता हो गया था।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने इस महीने कहा था कि ऑटोमोबाइल उद्योग में सेमीकंडक्टर की कमी से उत्पादन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसकी वजह से पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अगस्त में ऑटोमोबाइल थोक बिक्री में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। सेमीकंडक्टर की कमी के कारण सितंबर में मारूति सुजुकी के उत्पादन में 60 फीसदी की कटौती की गई है। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कहा है कि सेमीकंडक्टर की कमी के कारण वह सितंबर में उत्पादन में 20-25 फीसदी की कम करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अमेरिका दौरे पर Qualcomm के सीईओ क्रिस्टिआनो ई अमोन के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत में उपलब्ध व्यापक व्यवसायिक संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। सैनडिआगो की यह कंपनी सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर बनाने के साथ वायरलेस टेक्नोलॉजी से जुड़ी सेवाएं देती है। भारत क्वालकॉम से बड़े स्तर पर निवेश चाहता है।