इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (इंडिया चैप्टर) के सलाहकार पीके सिकदर के अनुसार, स्वतंत्र और अलग-थलग कार्रवाई सड़क सुरक्षा सुधार में स्थायी नतीजे नहीं दे सकती है और सिर्फ एक संरचित और बहु-क्षेत्रीय योजना ही तय नतीजे हासिल करने में मददगार हो सकती है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी), रुड़की में "एलआर कादियाली मेमोरियल लेक्चर सीरीज" के हिस्से के रूप में "सड़क सुरक्षा प्रबंधन - एक राष्ट्रीय प्राथमिकता" पर एक व्याख्यान देते हुए, सिकदर ने कहा कि एक व्यवस्थित और नियोजित दृष्टिकोण के जरिए सड़क सुरक्षा प्रदर्शन में सुधार के लिए वैश्विक योजना के लिए, सड़क सुरक्षा प्रबंधन पहला और मौलिक स्तंभ है।
सिकदर ने कहा, "वे देश, जो सड़क सुरक्षा परिणामों में सकारात्मक नतीजे हासिल करने में कामयाब रहे हैं, उन्होंने इसे सख्त दिशानिर्देशों और अत्यधिक समन्वित प्रारूप के तहत कार्यान्वित एक संरचित और बहु-क्षेत्रीय कार्य योजना द्वारा प्रबंधित किया है। सड़क सुरक्षा के सुधार में किसी भी स्वतंत्र और पृथक कार्रवाई ने कभी भी स्थायी नतीजे नहीं दिए हैं।"
"विश्व स्तर पर साबित हुए और स्वीकृत सुरक्षित प्रणाली दृष्टिकोण अधिकतम फायदे हासिल करने के लिए एक व्यापक और तार्किक कार्रवाई प्रदान कर सकता है। निश्चित रूप से, इस तरह के ढांचे को एक समन्वित तरीके से लागू करने के लिए, कई मोर्चों के साथ-साथ लक्षित परिणामों पर भी संस्थागत प्रबंधन की भूमिका के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करके प्रबंधन क्षमता से हासिल किया जाना चाहिए।"
सिकदर सड़क और परिवहन क्षेत्र में अनुसंधान और प्रबंधन के विशेषज्ञ भी हैं। इस मुद्दे को हल करने के लिए भारत की कोशिशों के बारे में विस्तार से बताते हुए सिकदर ने कहा, "एक सड़क सुरक्षा प्रबंधन ढांचा पहले ही विकसित किया जा चुका है, जो प्रबंधन के प्रभावी तरीकों और तत्वों की पहचान करता है, जो किसी देश या क्षेत्र में सड़क सुरक्षा प्रदर्शन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
"इस प्रकार, किसी भी अन्य सामान और सर्विस की तरह सुरक्षा का उत्पादन किया जाता है और संस्थागत प्रबंधन के साथ कई स्तरों पर एक प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता होती है, जो हस्तक्षेप की योजना और डिजाइन के लिए जिम्मेदार होती है, जो बदले में वांछित नतीजे पैदा करती है।"