हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स एक नए तरीके की नंबर प्लेट है जिसका निर्माण एल्यूमिनियम से किया जाता है। ये प्लेट्स टेंपर प्रूफ होती हैं यानी इनके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। साथ ही इनके साथ दो नॉन-रीयूजेबल लॉक्स मिलते हैं। नंबर प्लेट को हटाने के लिए इन लॉक्स को तोड़ना पड़ता है। लॉक टूट जाने के बाद इस नंबर प्लेट को दोबारा नहीं लगाया जा सकता। लिहाजा वाहन मालिक को एक अन्य नई नंबर प्लेट खरीदनी पड़ती है। नंबर प्लेट की बायीं तरफ क्रोमियम आधारित अशोक चक्र अंकित होता है और IND लिखा होता है। इसके साथ ही वाहन की पहचान के लिए दिया गया 'व्हीकल आईडेंटिफिकेशन नंबर' लेजर एनकोडेड होता है जिससे इसे स्कैन करना बहुत ही आसान हो जाता है और इससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं।
कलर कोडेड स्टिकर में कार का फ्यूल टाइप और भारत स्टेज यानी इमिशन नॉर्म्स की जानकारी होती है। पेट्रोल और सीएनजी कारों के लिए नीले रंग का स्टिकर दिया जाता है, वहीं डीजल कारों के लिए नारंगी और इलेक्ट्रिक कारों के लिए हरे रंग का का स्टिकर मिलता है। बीएस-6 कारों में स्टिकर के ऊपरी हिस्से में एक्सट्रा ग्रीन कलर की स्ट्रिप भी दी गई होती है। आपको गाड़ी की विंडस्क्रीन पर अंदर की ओर से इसे चिपकाना होता है।
अहम सवाल यह है अचानक से हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स को अनिवार्य क्यों कर दिया गया। तो इसका जवाब है कि वाहन चोरी की वारदातों पर लगाम कसने के इरादे से एचएसआरपी को लगाना अनिवार्य किया गया है। एचएसआरपी की मदद से चोरी हुए वाहनों को ट्रैक करने में आसानी होगी। पुराने रजिस्ट्रेशन प्लेट में नंबर स्टिकर होता था जिनके साथ आसानी से छेड़छाड़ की जा सकती है।
पुराने नंबर प्लेट्स पर लगे स्टिकर को कोई भी आसानी से हटा सकता है और कोई भी अन्य व्हीकल नंबर रजिस्ट्रेशन डाल सकता है। ज्यादातर चुराए गए वाहनों की नंबर प्लेट्स बदल दी जाती हैं। जिसके कारण उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। अब एचएसआरपी के रहते पुलिस सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से नंबर प्लेट को स्कैन और ट्रैक कर सकेगी।
यातायात नियमों को तोड़ने पर उल्लंघन करने वालों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। कई वाहनों की नंबर प्लेट्स पर क्षेत्रीय भाषा में नंबर लिखे होते हैं जो हर किसी के समझ में नहीं आते हैं, ऐसे में अब हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स के रहते ऐसी चीजों पर पाबंदी लग सकेगी। सबसे अहम बात यह है कि वाहन संबंधी डाटा का डिजिटिलिकरण करने में सरकार को काफी मदद मिलेगी।
कलर कोडेड स्टिकर दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। यहां 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों को चलाने की इजाजत नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुरानी पेट्रोल कार और 10 साल पुरानी डीजल कार इस्तेमाल नहीं की जा सकती है। ऐसे में एचएसआरपी लगने के बाद ऐसे वाहनों की नकेल कसने में पुलिस को काफी मदद मिलेगी।
दोपहिया वाहनों में एचएसआरपी लगाने की कीमत 600 रुपये और चार पहिया वाहनों के लिए 1000 रुपये तय की गई है। यह शुल्क वाहन की श्रेणी के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। कलर कोडेड स्टिकर के लिए 100 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है या फिर इन प्लेट्स के साथ वह पहले से ही लगा हुआ आता है। हालांकि यदि आपकी गाड़ी पर एचएसआरपी पहले से ही इंस्टॉल है तो आपको केवल कलर कोडेड स्टिकर ही लगवाना पड़ेगा।
एचएसआरपी के लिए ऐसे करें आवेदन
- एचएसआरपी रजिस्ट्रेशन व्हीकल ऑनर bookmyhsrp.com/index.aspx पर जाएं। यह वेबसाइट खासतौर पर दिल्ली, हिमाचल और उत्तर प्रदेश के लिए है।
- एचएसआरपी ऑप्शन या कलर कोडेड स्टिकर ऑप्शन चुनें।
- इसके बाद अपने वाहन के मॉडल का चयन करें। फिर अपने राज्य को स्थान के रूप में चुनें।
- इसके बाद अपने वाहन के निजी या वाणिज्यिक में से किसी एक विकल्प को चुनें।
- प्राइवेट व्हीकल टैब पर क्लिक करने पर पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रिक, CNG और CNG+पेट्रोल का ऑप्शन चुनें।
- पेट्रोल टाइप के टैब पर क्लिक करने पर वाहनों की श्रेणी खुलेगी। इसमें बाइक, कार, स्कूटर, ऑटो और भारी वाहन जैसे विकल्प होंगे।
- इसके बाद आप और आपके वाहन से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी भरें।
- डिटेल्स भरने के बाद आपके मोबाइल फोन नंबर पर एक ओटीपी आएगा, इसे आवश्यक बॉक्स में दर्ज करें।
- इसके बाद डीलर के पास जाने के लिए तारीख और समय का चयन करें।
- आखिर में आपको ऑनलाइन भुगतान करना होगा।
- इसके बाद आपको ई-मेल और एसएमएस के जरिए भुगतान की पर्ची मिलेगी।
अब लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, और गाजियाबाद के लोगों के लिए एचएसआरपी की होम डिलीवरी का ऑप्शन भी रख दिया गया है। इसके अलावा स्थानीय आरटीओ पर भी एचएसआरपी खरीदी जा सकती है।