फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा में आज तक कोई नहीं तोड़ पाया ‘बाईजी’ का रिकॉर्ड, हुई थीं निर्विरोध निर्वाचित

Wed, 09 Oct 2019 06:00 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
विज्ञापन
पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव - फोटो : amar ujala (File)
विज्ञापन

हरियाणा विधानसभा की रेवाड़ी सीट पर बना एक रिकॉर्ड आज तक बरकरार है। पिछले 61 साल में कोई भी उम्मीदवार इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है। हरियाणा बनने से पहले और उसके बाद रेवाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से सुमित्रा देवी को छोड़कर कोई भी महिला या पुरुष निर्विरोध रूप से निर्वाचित होकर विधानसभा नहीं पहुंचा है। 1957 में तत्कालीन अविभाजित पंजाब के रेवाड़ी निर्वाचन क्षेत्र से राव तुलाराम की पोती सुमित्रा देवी विधानसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं।

विज्ञापन

सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली सुमित्रा देवी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय थी। इसी वजह से उन्हें ‘बाई जी’ कह कर बुलाया जाता था। वे चार बार विधायक रहीं।

कांग्रेस-भाजपा ने नहीं दिया एक भी महिला को टिकट

प्रदेश की राजनीति के जानकार एवं शोधार्थी रविंद्र कुमार का कहना है कि सुमित्रा देवी रेवाड़ी तत्कालीन शासक राव तुलाराम की पोती थी। राव तुलाराम ने 1857 में भारतीय स्वतंत्रता के पहले संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। सुमित्रा देवी (1912-1995) को 1957 में निर्विरोध कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुना गया था। वे तीन बार कांग्रेस से और एक बार विशाल हरियाणा पार्टी की टिकट पर विधानसभा में पहुंची थीं। बाई जी का सामाजिक कद ऐसा था कि वामपंथी और समाजवादियों समेत किसी भी राजनीतिक दल ने 1957 के दशक में उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा था।

अहिरवाल क्षेत्र के एक सम्मानित शाही परिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपना जीवन एक आध्यात्मिक और सामाजिक संगठन भगवद भक्ति आश्रम, रेवाड़ी के रामपुरा गांव में बिताया। वे अविवाहित रहीं। आज हालत यह है कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस भाजपा ने इस क्षेत्र की 11 में से किसी भी सीट पर अहीरवाल समाज को किसी महिला उम्मीदवार को मौका नहीं दिया है।

2014 में पांच महिलाओं को दिया था टिकट

बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में अहीरवाल समाज से भाजपा ने दो महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था। पटौदी से बिमला चौधरी और अटेली से संतोष यादव ने जीत दर्ज कराई थी। वहीं कांग्रेस ने भी तीन महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा था। भाजपा नेता अरविंद यादव कहते हैं कि भाजपा ने हरियाणा में 12 महिलाओं को टिकट दिया है। कांग्रेस पार्टी के नेता कुलदीप शर्मा का कहना है कि ऐसा नहीं है, हर सीट पर उम्मीदवार के जीतने की क्षमता के अनुसार टिकटों का वितरण किया गया है। कांग्रेस ने भी हरियाणा में कई महिलाओं को टिकट दी है। अहीरवाल में गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले शामिल हैं। इन इलाकों को यादव बाहुल्य माना जाता है।

राव अभय सिंह को 5,633 मतों से हराया

सुमित्रा देवी के पिता राव बलबीर सिंह 1921 से 1941 तक अविभाजित पंजाब में पंजाब विधान परिषद और पंजाब विधान सभा के सदस्य बने रहे। राव बलबीर सिंह, केंद्रीय मंत्री और गुड़गांव के भाजपा सांसद इंद्रजीत सिंह के पिता राव बीरेंद्र सिंह के भाई थे। 1962 के चुनावों में, सुमित्रा देवी ने एक निर्दलीय उम्मीदवार हुकुम सिंह को 17,563 मतों के अंतर से हराया था। हरियाणा के अलग राज्य बनने के बाद, सुमित्रा देवी 1967 में नए राज्य का पहला चुनाव जीतने वाली चार महिला विधायकों में शामिल थीं।

विज्ञापन


उन्होंने अहीरवाल के दूसरे प्रमुख अहीर नेता राव अभय सिंह को 5,633 मतों से हराया था। भारतीय जनसंघ के नेता राव अभय सिंह, हरियाणा में पूर्व मंत्री रहे कैप्टन अजय यादव के पिता थे। अजय यादव कई बार रेवाड़ी से विधायक चुने गए हैं। इस बार कांग्रेस पार्टी ने कैप्टन अजय यादव के बेटे और राव अभय सिंह के पोते चिरंजीव को रेवाड़ी से चुनाव मैदान में उतारा है। सुमित्रा देवी के भाई राव बीरेंद्र सिंह, जो 24 मार्च से 2 नवंबर, 1967 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, ने एक क्षेत्रीय पार्टी विशाल हरियाणा पार्टी की स्थापना की थी।
 

बाई जी ने महिला सशक्तिकरण और समाज के वंचितों के उत्थान के लिए काम किया था। वे महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थीं। आधुनिक समय के राजनेताओं के विपरीत, बाई जी ने अपना जीवन सामाजिक कारणों के लिए समर्पित कर दिया। शाही वंश से होने के बावजूद, उन्होंने अपना पूरा जीवन अत्यंत तपस्या के साथ आश्रम में बिताया।

 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें