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कमाल है : न शोर, न प्रदूषण, न पेट्रोल की जरूरत, इलेक्ट्रीशियन ने जुगाड़ से बनाई खुद की इलेक्ट्रिक बाइक

Wed, 25 Aug 2021 07:48 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत जैसे देश में जहां आम आदमी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी एक दूर का सपना है, यहां एक ऐसा व्यक्ति है जिसने अपने दम पर वाहन बनाया है।
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electric bike jugaad - फोटो : For Reference Only
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विस्तार
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पेट्रोल की बढ़ती कीमतें धीरे-धीरे दुनिया को वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले परिवहन की ओर मोड़ रही हैं। इस बीच इलेक्ट्रिक वाहनों को दुनियाभर में बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में भी इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है और काफी बड़ा हो रहा है। भारत जैसे देश में जहां आम आदमी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अभी भी एक दूर का सपना है, यहां एक ऐसा व्यक्ति है जिसने अपने दम पर वाहन बनाया है। यह कारनाम कर दिखाया है 42 वर्षीय ए सरवनन ने, जो तमिलनाडु के पोन्नामारवती में इदियाथुर के निवासी है। पेश से वे एक इलेक्ट्रीशियन हैं। 
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बचपन का जुनून किया पूरा
कोविड-19 महामारी के बाद लगे लॉकडाउन में उनकी नौकरी चली गई। जिसके बाद, सरवनन खेती करके अपने माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों सहित सात लोगों के अपने परिवार का किसी तरह पेट पाल रहे हैं। इस दौरान उनके पास कुछ समय बचने लगा। मशीनों के साथ प्रयोग करना उनके बचपन का जुनून था और इस खाली समय को उन्होंने अपने उसी जुनून को पूरा करने में लगाया। 

मिल रहा है 45 किमी का माइलेज

सरवनन कहते हैं, "सात साल पहले, मैंने एक इलेक्ट्रिक बाइक बनाने की कोशिश की। दुर्भाग्य से, उसमें नाकाम हो गया था। उसके बाद, मैं इसके बारे में पढ़ता रहा और इस पर कई वीडियो देखता रहा। लॉकडाउन के दौरान, मैंने फिर से प्रयोग करना शुरू कर दिया।" 

बाइक बनाने में लगे 26000 रुपये
सरवनन ने पहले एक पुराना दोपहिया वाहन खरीदा और उसमें बैटरी लगाने की कोशिश की। इस जुगाड़ ने कुछ हद तक काम किया। बेहतर नतीजा पाने के लिए उन्होंने फिर 2,500 रुपये में बेहतर स्थिति में एक और पुराना दोपहिया वाहन खरीदा। इस बार, उनका प्रयोग कामयाब रहा। उन्होंने 26,000 रुपये खर्च किए और इस वाहन को ठीक करने में तीन महीने का समय लग गया। अब वह इसे 45 दिनों से ज्यादा समय से इस्तेमाल कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उनकी यह देसी इलेक्ट्रिक बाइक लगभग 45 किमी का माइलेज दे रही है और काफी बेहतर तरीके से चल रही है।  

बाइक बनाने में पुराना ज्ञान काम आया

उन्होंने दोपहिया के पूरे इंजन को बदल दिया है। उन्होंने चेन्नई से एक ब्रशलेस डीसी (बीएलडीसी) मोटर, कंट्रोलर यूनिट और किट मंगवाई थी। सरवनन के मुताबिक, "ऐसी बाइक बनाने के लिए, आपको इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग और मैकेनिकल ज्ञान की जरूरत होती है। चूंकि मैंने तिरुचि में एक निजी इलेक्ट्रिक कंपनी में काम किया है, इसलिए मुझे वेल्डिंग का काम भी पता है। ऐसे मॉडिफिकेशन को करते समय वेल्डिंग की जरूरत सबसे ज्यादा होती है।" 

65 किमी तक पहुंच सकता है माइलेज

वे बताते हैं, "ऐसी मोटरों और किटों का ऑर्डर देते समय मैंने कई बार धोखा खाया है। लेकिन इस बार सब कुछ ठीक रहा। आमतौर पर, ई-बाइक में 20 Ah लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। मैं इसे खरीदने का खर्च नहीं उठा सकता था। इसलिए, मैंने एक लेड एसिड 14 Ah बैटरी का इस्तेमाल किया, जो आमतौर पर बाइक्स में इस्तेमाल होती है। अगर ई-बाइक की बैटरी का इस्तेमाल किया जाए, तो माइलेज 65 किमी तक पहुंच सकता है।"

बाइक को ऐसे करते हैं चार्ज

सरवनन अपने घर में लगे सोलर पैनल की मदद से बाइक की बैटरी को चार्ज करते हैं। वे कहते हैं, "मेरे पास घर पर 315 वाट के चार सोलर पैनल हैं। मेरे पास एक यूपीएस है जिसमें 150 Ah बैटरी स्टोरेज है। मैं यूपीएस के जरिए अपने सोलर पैनलों और बैटरी के माध्यम से यूपीएस चार्ज करता हूं।"
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बहुत खास है यह ई-बाइक

इस इलेक्ट्रिक वाहन की खासियत यह है कि विकलांग व्यक्ति भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। सरवनन कहते हैं "हर बार जब आप ब्रेक दबाते हैं, तो मोटर चलना बंद कर देती है, बैटरी बचाती है, और आपको बेहतर माइलेज देती है।"

अपनी खुद की इलेक्ट्रिक बाइक के बारे में वे शान से कहते हैं, "कोई शोर नहीं है, कोई आवाज नहीं है, कोई प्रदूषण नहीं है, और सबसे महत्वपूर्ण बात, इसमें पेट्रोल डालने की भी जरूरत नहीं है।"
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