दामों में 1.18 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी
एक तरफ जहां सेमीकंडक्टर चिप की शॉर्टेज ने ऑटो कंपनियों को रुला कर रख दिया है। वहीं कच्चे माल जैसे स्टील और अन्य कीमती धातुओं के दामों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। लागत में बढ़ोतरी के चलते ऑटो कंपनियां तीसरी बार भी दाम बढ़ने की खबरों से इंकार नहीं कर रही हैं। कंपनियां पहले ही जनवरी 2021 के पहले हफ्ते में तीन से चार फीसदी तक गाड़ियों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। वहीं स्टील, एलुमीनियम और प्लास्टिक के दाम बढ़ने से लागत में बढ़ोतरी का दावा कर कंपनियां अप्रैल में भी कीमतें बढ़ा चुकी हैं। मारुति सुजुकी, रेनो, हीरो मोटोकॉर्प, निसान, टोयोटा और एमजी मोटर ने इसी महीने अपने वाहनों के दामों में 1.18 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी की है।
ग्राहकों के गुस्से का भी डर
लेकिन ऑटो कंपनियों को लग रहा है कि अभी तक बढ़ी कीमतें नाकाफी हैं और दूसरी तिमाही में एक बार फिर से कीमतों में बढ़ोतरी की लहर देखने को मिल सकती है। वहीं कंपनियों को ये भी डर है कि दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ग्राहकों का मूड भी बिगाड़ सकती है। वाहन सेक्टर से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक हम पहले ही दो बार कीमतें बढ़ा चुके हैं और तीसरी बार फिर बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। क्योंकि स्टील कंपनियां जुलाई में फिर से कीमतें बढ़ाने की बात कर रही हैं। इसके अलावा रोडियम जैसे कीमती धातुओं के दाम बढ़ चुके हैं। जिसका असर गाड़ियों की निर्माण लागत पर पड़ना तय है।
कैफ-2 और कैफ-3 मानक भी बढ़ाएंगे दाम
उनका कहना है कि बीएस6 के चलते स्टील, प्लास्टिक और रोडियम का इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं कड़े उत्सर्जन मानकों के चलते वाहनों के कैटेलिटिक कनवर्टर में रोडियम की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ी है, क्योंकि रोडियम बेशकीमती प्लेटिनम ग्रुप की धातु है, जिसका ज्यादातर इस्तेमाल वाहनों के कैटेलिटिक कनवर्टर में उत्सर्जन नियंत्रण के लिए किया जाता है। इसके अलावा 2023 से कैफ-2 और कैफ-3 मानक भी लागू होने वाले हैं जिससे लागत में बढ़ोतरी होगी और इसका असर गाड़ियों के दामों पर दिखेगा।