दीवारों में दरार एवं सीलन नहीं होनी चाहिए इसके अलावा घर में कहीं भी मकड़ी के जाले नहीं होने चाहिए
- फोटो : अमर उजाला
हमारे ऋषि-मुनि ब्रह्माण्ड में छिपी हुई शक्तियों के विषय में जानते थे। वास्तुपुरुष में यही व्याप्त शक्ति जीवनी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है जो वास्तुपुरुष में सदैव निहित रहती है। सौर ऊर्जा, ग्रहों का प्रभाव, पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति, वायु तथा अग्नि के रूप में जानी जाती है। इन सबका असर हमारे जीवन, घर और कार्य पर पड़ता है। जगत के अंदर चर-अचार सभी के ऊपर इनका प्रभाव जिस कोण से जैसे पड़ता है हम उससे प्रभावित होकर विभिन्न घटनाओं के सुखद एवं दुखद रूप से प्रभावित होते हैं। नकारात्मक ऊर्जा और सकारात्मक ऊर्जा दोनों में अंतर हमारा मस्तिष्क इसको पहचानता है।
जब हम किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, बगीचे अथवा जल के किनारे जाते हैं तो मन को शांति महसूस होती है। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि वहां पर सकारात्मक ऊर्जा की अधिकता के कारण हम खुश और प्रांजल हो जाते हैं। और जब हम शोर-गुल, आंधी-तूफ़ान तथा कब्रिस्तान आदि के प्रभाव से गुज़रते हैं तो हमारी मानसिक स्थिति विचलित होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा के संकेत हैं। आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी जैसे महासंकट से जूझ रहा है, चारों तरफ डर और दहशत की वजह से हम सबके अंदर नकरात्मकता आ गई है। ऐसे नकारात्मक माहौल में आप वास्तु के कुछ नियमों को अपनाकर अपने आस-पास सकारात्मक वातावरण बना सकते हैं जिससे आपको ख़ुशी और मानसिक शांति मिल सकती है।आइए जानते हैं....