अगर आप कंसलटेंसी चलाते हैं या इस
काम को शुरू करने की सोच रहे हैं तो इस इस बात ध्यान रखें कि आपके ऑफिस का वास्तु
सही हो। वास्तु में गड़बड़ी होने पर कन्सलटेंसी का बिजनेस लाभप्रद नहीं रहता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार जिन कार्यों में लोग सलाह-मशविरे लेने आते हैं उन कार्यों
के लिए वायव्य दिशा उपयुक्त होती है। वायव्य दिशा उत्तर-पश्चिम के मध्य को कहा जाता
है। वास्तु शास्त्र में इस दिशा का स्वामी वायु देव को बताया गया है।
वायव्य दिशा दोष पूर्ण होने पर मान-सम्मान एवं यश में कमी आती है। लोगों से
अच्छे सम्बन्ध नहीं बन पाते हैं तथा अदालती मामलों में भी उलझना पड़ सकता है। इसके
विपरीत वायव्य दिशा दोष मुक्त होने पर लोगों को सलाह से लाभ मिलता। मान एवं यश की
प्राप्ति होती है। लोगों से अच्छे संबंध बने रहते हैं। कंसलटेंट, चिकित्सा, वकालत,
आध्यात्मिक, आर्किटेक्ट का काम करने वालों के लिए जरूरी है कि वायव्य दिशा दोष
मुक्त हो क्योंकि इनकी तरक्की और लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि इनका यश बढ़े
नये-नये लोगों से अच्छे संबंध बनते रहे।
वायव्य दिशा को उर्जावान बनाने के
उपाय
कंसलटेंसी, चिकित्सा, वकालत, आध्यात्मिक, आर्किटेक्ट का कार्य करने वालों
को वायव्य दिशा दोष मुक्त रखना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले यह ध्यान रखें कि ऑफिस
वायव्य दिशा में हो। अगर ऐसा संभव नहीं हो तो अपने ऑफिस के वायव्य कोण को दोष मुक्त
करने के लिए यात्रा संबंधी तस्वीर इस दिशा में लगाएं। वायव्य दिशा यात्रा की दिशा
भी है इसलिए इससे दोष दूर होता है। इस दिशा में कोई ऐसी कलाकृति लगाएं जो
कल्पनाशीलता को जागृत करे, इससे भी वायव्य दिशा दोष मुक्त होता है।
वायव्य
दिशा को दोष मुक्त रखने के लिए इस दिशा में रोशनी की समुचित व्यवस्था करें। इस दिशा
में क्रिस्टल बॉल रखने से भी लाभ मिलता है। वायव्य दिशा को उर्जावान बनाये रखने के
लिए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह दिशा उत्तर-पूर्व से नीचा नहीं हो तथा इस दिशा
में बिजली के उपकरण न लगाएं।