फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार, ऐसे करें वास्तु उपचार

विज्ञापन
विज्ञापन
वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा का द्वार शुभ नहीं माना जाता है। इसे संकट का द्वारा भी कहा जाता है जबकि, पूर्व दिशा को समृद्घि का द्वार कहा जाता है। यही कारण है कि लोग अधिक कीमत देकर भी पूर्व दिशा की ओर मुंह वाला मकान खरीदना पसंद करते हैं और दक्षिण की ओर मुंह वाला घर कम कीमत में भी लेना पसंद नहीं करते हैं।
विज्ञापन


इस तरह की धारणा का कारण यह है कि लोग वास्तु के नियम को गहराई से समझे बिना अपनी राय बना लेते हैं। वास्तुविद् पं. प्रवीण पुरोहित जी बताते हैं कि दक्षिण दिशा सभी व्यक्ति के लिए अशुभ नहीं होता है। जिन व्यक्तियों का जन्म मेष, धनु अथवा सिंह राशि में हुआ है उनके लिए दक्षिण दिशा का द्वार कष्टकारी नहीं होता है।

लेकिन जरूरी नहीं कि घर में रहने वाले सभी व्यक्तियों की राशि इन्हीं तीन में से एक हो। इसलिए दक्षिण दिशा के द्वार के अशुभ प्रभाव को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका हो तो वास्तु दोष दूर करने के कुछ सामान्य से उपाय को आजमाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख्य द्वार वाले घर में भी सुख पूर्वक रहा जा सकता है।
विज्ञापन


वास्तु उपाय
द्वार के ठीक सामने एक आदमकद दर्पण इस प्रकार लगाएं जिससे घर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति का पूरा प्रतिबिंब दर्पण में बने। इससे घर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति के साथ घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक उर्जा पलटकर वापस चली जाती है। द्वार के ठीक सामने आशीर्वाद मुद्रा में हनुमान जी की मूर्ति अथवा तस्वीर लगाने से भी दक्षिण दिशा की ओर मुख्य द्वार का वास्तुदोष दूर होता है। मुख्य द्वार के ऊपर पंचधातु का पिरामिड लगवाने से भी वास्तुदोष समाप्त होता।  

जो लोग घर बनावा रहे हों और उनके भवन का मुख्यद्वार दक्षिण दिशा के अलावा अन्य दिशा में नहीं हो सकता है तब दक्षिण दिशा के वास्तु को दूर करने के लिए गृह निर्माण के समय ही वास्तु उपाय कर लेना चाहिए। इसके लिए सबसे सरल उपाय यह है कि दक्षिण पूर्व से एक तिहाई भाग छोड़कर मुख्य द्वार का निर्माण करवायें।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें