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Saturn Vakri 2024: शनिदेव होने जा रहे वक्री, इन राशियों पर साढ़ेसाती का रहेगा अशुभ प्रभाव

Sat, 08 Jun 2024 03:35 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

शनि देव 30 जून को वक्री यानी उल्टी चाल चलने वाले हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं जो किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि की धीमी चाल का असर जातकों के जीवन पर लंबे समय तक रहता है।
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कुंभ राशि में शनि होंगे वक्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Saturn Vakri  2024: वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल का विशेष महत्व होता है। ग्रह जब भी एक से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं या फिर वक्री और मार्गी होते हैं तो इसका व्यापक असर जातकों के जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। आपको बता दें कि न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव 30 जून को वक्री यानी उल्टी चाल चलने वाले हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं जो किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि की धीमी चाल का असर जातकों के जीवन पर लंबे समय तक रहता है। शनि के वक्री होने पर जिन राशि वालों शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है उनके ऊपर अशुभ प्रभाव पड़ने वाला है। ऐसे में इन राशि के जातकों को बहुत ही संभलकर चलना होगा। 

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इन राशियों पर पड़ेगा साढ़ेसाती का अशुभ प्रभाव
शनिदेव के कुंभ राशि में होने के कारण मकर, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। ऐसे में शनि का कुंभ राशि में वक्री होना मीन राशि पर साढ़ेसाती का कष्ट भरे दिन शुरू होने वाले हैं। वहीं कुंभ राशि के जातकों पर शनि का दूसरा चरण और मीन राशि पर तीसरा चरण भी बहुत ही कष्टकारी रह सकता है। ऐसे में इन तीन राशि के जातकों को बहुत कष्ट और आर्थिक परेशानियां का सामना करना पड़ सकता है। धन की हानि होने की संभावना है जिससे आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। इन राशि वालों को बेवजह के तनाव का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के सदस्यों और जीवनसाथी के साथ किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। 

इन राशियों पर ढैय्या का अशुभ प्रभाव
शनि के कुंभ राशि में होने की वजह से कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव है। शनि जब 30 जून को कुंभ राशि में वक्री होंगे तक इन दो राशि के जातकों पर बहुत बुरा प्रभाव देखा जा सकता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक शनिदेव कर्क राशि वालों की कुंडली के आठवें भाव में जबकि वृश्चिक राशि के जातकों की कुंडली में शनि चौथे स्थान पर गोचरस्थ हैं। ऐसे में इन दोनों ही राशि के जातकों के जीवन में आने वाला कुछ समय परेशानियों से भरा रहने वाला होगा। आपको इस दौरान कार्य में असफलताओं का सामना करना पड़ सकता है। भाग्य का अच्छा साथ नहीं मिलने पर हाथ में आए अच्छे मौके फिसल सकते हैं। धन हानि के होने के भी संकेत हैं। 
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