9 ग्रहों में चन्द्रमा को शुभ ग्रह माना गया है और इसकी राशि कर्क कही गयी है। ज्योतिषशास्त्र में चंद्रमा को ग्रहों में रानी का दर्जा मिला हुआ है। यह एक राशि में सिर्फ ढाई दिन रहता है लेकिन इन ढ़ाई दिनों में ही यह बहुत कुछ कर जाता है। जन्म के समय यह जिस राशि में होता वही व्यक्ति की जन्म राशि कहलाती है और इसका प्रभाव तमाम उम्र व्यक्ति पर होता है। वैवाहिक जीवन को तो यह खासा प्रभावित करता है। कुंडली में इसकी स्थिति के अनुसार व्यक्ति जीवनसाथी से यौन संबंध को लेकर असंतुष्टि हो सकता है तो विवाहेत्तर संबंध में भी उलझ जाता है। आइये दखें वैवाहिक जीवन को चन्द्रमा कैसे प्रभावित करता है।
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कुंडली में यहां चन्द्रमा होने पर धनवान विधवा से बनता है प्रेम संबंध, और भी होता है बहुत कुछ
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विवाह
जन्मपत्री में शनि बलवान हो और चन्द्रमा पर उसकी दृष्टि पड़ रही हो या शनि के साथ चन्द्रमा बैठा हो तब व्यक्ति की शादी देर से होती है। इस तरह के व्यक्ति शक की वजह से अपने वैवाहिक जीवन के सुख को भी नष्ट कर लेते हैं। ऐसी कुंडली में चन्द्रमा पर किसी शुभ ग्रह जैसे शुक्र, गुरू की दृष्टि हो तब स्थिति थोड़ी राहत देने वाली हो सकती है।
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कुंडली विवाह
शनि की राशि मकर या कुंभ में चन्द्रमा कुंडली के सातवें घर में होने पर व्यक्ति के जीवनसाथी का संबंध किसी अन्य के साथ भी हो सकता है। इसकी वजह है कि चन्द्र और शनि के बीच शत्रु संबंध होता है। इनमें कुंभ राशि का चन्द्रमा वैवाहिक संबंध में दूरियां बढ़ाने का भी काम करता है।
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कुंडली
शुक्र की राशि वृष या तुला में अगर चन्द्रमा 12 वें घर में बैठा हो तब व्यक्ति का स्वभाव उग्र होता है। ऐसे व्यक्तियों में बहुत अधिक काम भाव होता है अगर जन्मपत्री में शुभ ग्रहों का प्रभाव नहीं हो तब व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से संतुष्टि नहीं मिलती है।
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कुंडली
जन्मपत्री के छठे घर में राहु के साथ चन्द्रमा बैठा हो तब व्यक्ति का संबंध किसी ऐसे धनवान व्यक्ति से होता है जिसके जीवनसाथी की मृत्यु हो चुकी हो।
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कुंडली
मंगल की राशि मेष या वृश्चिक में चन्द्रमा सातवें घर में बैठा होने पर व्यक्ति का जीवनसाथी के साथ ठीक तालमेल नहीं बन पाता है जिससे तनाव बना रहता है। इसका कारण यह है कि वृश्चिक राशि में चन्द्रमा नीच का होकर व्यक्ति को शंकालु बना देता है।