जिन लोगों ने भी बहुत अधिक कर्म किया है या बड़े निर्णय किए हैं उन्हीं लोगों को समाज में बहुत अधिक ऊंचाई मिली है। जो लोग अदम्य साहस का परिचय देते हैं, हम पाएंगे कि उनमें से अधिकांश की कुंडलियों में मंगल दोष उपलब्ध है। मंगल संघर्ष क्षमता का प्रतीक है। मंगल व्यक्ति को थकने नहीं देता। मंगल हार भी नहीं मानने देता। मंगल अन्तिम जीत में विश्वास रखता है। मंगल सेनापति है जो किसी की जीत के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता है। परन्तु मंगल पर शासन करना बहुत अधिक मुश्किल है और मंगल स्वयं शासक रहना चाहता है।
जिनके मंगल दोष है उनकी कुंडली में आप आश्चर्यजनक ढंग से अनुशासन और समयबद्ध कार्यक्रम पाएंगे। मंगल में भूख-प्यास सहने की अत्यधिक क्षमता होती है। वे लोग महत्वाकांक्षी तो होते हैं परन्तु जीवन में हर प्रकार का त्याग करने में भी सक्षमहोते हैं। उन्हें भूख-प्यास या अभाव नहीं सताते या उनके जीवनक्रम में ये अत्यन्त गौण पक्ष हैं। उन्हें यातो अनुशासन चाहिए या समयबद्ध कार्यक्रम चाहिए या संगठन क्षमता चाहिए या अन्तिम जीत चाहिए और उसकी प्रतीक्षा में बिताए जाने वाले वर्ष भी चाहिए। यह सब मिल जाए तो मंगल को कोई नहीं हरा सकता। ऐसा नहीं कि मंगल ने सिर्फ सेनापति बनाया हो। प्रसिद्ध संतों की कुंडलियों में भी यही मंगल मिलता है।
इस लेख का निष्कर्ष यह है कि पंडितों ने मंगल दोष को लेकर बहुत अधिक बदनामी की हुई है। मंगल में छुपे हुए सौंदर्य को झांकने की लोगों ने कोशिश ही नहीं की। मंगल दोष वाले व्यक्तियों के जीवन के
अन्य पक्ष जब आप देखेंगे तो आपको उनकी ऊंचाई में मंगल का सौंदर्य अवश्य नजर आ जाएगा।