कुछ लोगों को ज्योतिष शास्त्र, पूजा-पाठ, ईश्वर आराधना से बहुत लाभ मिलता है, तो कुछ को नहीं। इसके पीछे कारण है, व्यक्ति के अंतर्मन में विद्यमान उसकी आदतें। कहा भी गया है, आदमी अपनी आदतों का दास होता है। ईश्वर अथवा गुरु की प्रेरणा से यदि व्यक्ति अपनी आदत बदल लेता है, तो उसके ग्रह-नक्षत्र भी सुधरने लगते हैं। दुर्लभ प्राचीन लाल किताब का फरमान कहता है, आदत बदल लें, किस्मत बदल जाएगी। आदतों का भाग्य और ग्रह-नक्षत्रों से घनिष्ठ संबंध है। शायद कुछ लोग आश्चर्यचकित होंगे कि कैसे आदतें भाग्य बनाने और बिगाड़ने की क्षमता रखती हैं। यदि हम अपनी आदतों और सोचने की दिशा में बदलाव करें, तो हमारी जिंदगी की दशा और दिशा, दोनों में परिवर्तन हो सकता है।
अनिष्ट ग्रहों की अपनी एक चाल होती है, अनिष्ट ग्रह का प्रभाव सर्वप्रथम मस्तिष्क के विचार एवं मन पर पड़ता है, जिसके कारण व्यक्ति अनिष्ट ग्रह की समय अवधि तक दुविधा में रहता है और वह किसी बात पर सही निर्णय नहीं ले पाता। इसी कारण वह गलत फैसले लेकर नुकसान उठाता है। ऐसी परिस्थिति में अगर व्यक्ति अपनी आदत में बदलाव करे और खुद फैसला लेने की अपेक्षा महत्वपूर्ण फैसले लेने के समय माता-पिता, भाई-बंधु, जीवनसाथी अथवा गुरु की सलाह ले, तो गलत निर्णय से होने वाली असफलता एवं हानि को सफलता एवं लाभ में परिवर्तित किया जा सकता है।
अपनी दिनचर्या में हम ऐसे कई कार्य करते हैं, जो हमारे स्वभाव को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। जब धीरे-धीरे यह कार्य हम रोजाना करने लगते हैं, तो कुछ समय के बाद यह हमारी आदत बन जाते हैं। साधारण-सी दिखने वाली आपकी कुछ आदतें कब आपके जीवन में आशा अथवा निराशा भर देती हैं, आपको पता भी नहीं चलता। अच्छी आदतों को अपनाने से उनका सकारात्मक असर ग्रह अनुकूलता के रूप में प्राप्त होने लगता है। जब हम बुरी आदतें अपना लेते हैं, तो इसका हमारे भाग्य एवं कुंडली के ग्रहों पर बेहद बुरा होता है। ग्रह नक्षत्रों से ही आदत एवं स्वभाव बनता-बिगड़ता है। इसलिए स्वभाव को परिवर्तित करने से ग्रह-नक्षत्र भी परिवर्तित होने लगते हैं।
ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए दान का विशेष महत्व है।अपनी आदत के अनुसार कुछ धनवान एवं सम्पन्न व्यक्ति दान करने की प्रवृत्ति नहीं रखते, अकूत धन संपत्ति संग्रहित होने के बावजूद, उन्हें सदा धन की कमी का अनुभव होता है। अगर व्यक्ति की अंदरूनी प्रवृत्ति अथवा उसके विचार में दान करने से धन घटता है, तो धनवान एवं सम्पन्न होने के बावजूद वह अपनी आदत के अनुसार दान नहीं कर पाता। इस आदत के चलते शुभ ग्रह भी अशुभ ग्रहों की भूमिका में कष्ट देने लगते हैं।
ऐसे में अगर व्यक्ति अपनी प्रवृत्ति को परिवर्तित कर दान करने का संकल्प करता है, तो इसी संकल्प एवं दान के साथ ग्रह-नक्षत्रों में लिखा दोष एवं अशुभ फल भी शुभ कल्याणकारी परिणामों में परिवर्तित हो जाता है। यदि आपकी कुंडली में कोई ग्रह कमजोर है या ठीक स्थिति में नहीं है, तो इसका पता उसकी आदतों से लगाया जा सकता है और सही उपाय कर अनिष्ट ग्रह के दुष्प्रभाव को परिवर्तित किया जा सकता है। इसलिए कहा गया है, 'हमारी आदतों का संबंध हमारे भविष्य से होता है। यही नहीं इसका संबंध हमें प्राप्त होने वाले सुख-दुःख से भी है। आदतें बता देती हैं कि हमारी सोच कैसी है और हमारा स्वभाव कैसा है। अगर आदतों में बदलाव या उन पर विजय पाई जाए, तो हम अपने जीवन में बहुत बदलाव ला सकते हैं।