Budh Gochar 2025: बुध को ग्रहों का राजकुमार माना गया है। मई माह के तीसरे सप्ताह यानी 23 मई 2025 को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर बुध मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ग्रहों में बुध को सम ग्रह माना जाता है। इसके अलाव बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित और तर्क-वितर्क के कारक ग्रह हैं। कालपुरुष की कुंडली में बुध को मिथुन और कन्या राशि पर बुध ग्रह का आधिपत्य हासिल है। बुधदेव अपनी राशि में यानी कन्या में उच्च के जबकि मीन राशि में नीच के होते हैं। बुध की महादशा 17 वर्षों तक होती है। बुध के कुंडली में मजबूत होने पर व्यक्ति बहुत ही तेज बुद्धि का होता है। बुध के मेष से वृषभ राशि में गोचर करने से आइए जानते हैं वृषभ राशि के जातकों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
बुध का कुंडली पर प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं।
कुंडली में बुध को मजबूत करने के उपाय