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जन्मकुंडली में सूर्य: सूर्य की तरह जीवन में ऐसे चमकते हैं कुछ लोग

Sat, 10 Oct 2020 02:30 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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सृष्टि सृजन में सूर्य की विशेष महत्ता है। इनकी अमृतरूपी रश्मियों के द्वारा ही जीव की उत्पत्ति होती है। - फोटो : Social Media
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वैदिक ज्योतिष के अनुसार आदिकाल में सूर्यदेव के पास सभी राशियों का आधिपत्य था किन्तु कालांतर में इन्होंने सिंह राशि अपने पास रखा और कर्क राशि का आधिपत्य चंद्रमा को दे दिया। बाकी के पाँच ग्रहों मंगल, बुध, गुरु, शुक्र तथा शनि को दो-दो राशियों का अधिपति नियुक्त किया। सृष्टि सृजन में सूर्य की विशेष महत्ता है। इनकी अमृतरूपी रश्मियों के द्वारा ही जीव की उत्पत्ति होती है। ज्योतिष में इन्हें आत्मा का कारक, शोध परक कार्य करने वाला, राजयोग प्रदान करने वाला, नेत्रों का स्वामी, कुशल प्रशासक, यश तथा कीर्ति प्रदान करने वाले ग्रह के रूप में जाना जाता है। जन्म कुंडली में इनकी स्थिति जातक के जीवन की दशा-दिशा बदलने में पूर्णतः सहायक होती है। व्यक्ति के जीवन  की सफलता और असफलता का ग्राफ काफी कुछ सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए जन्मकुंडली विश्लेषण के समय सूर्य किस भाव में हैं इसका गहनता से विवेचन करना चाहिए। जातक की जन्मकुंडली के सभी बारह भावों में सूर्य का फल किस प्रकार रहता है इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।

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प्रथम भाव
जिन जातकों की जन्म कुंडलियों में सूर्य प्रथम भाव में रहते हैं उनके चेहरे पर एक विशेष तरह की आभा रहती है। सूर्य बलवान हो तो ऐसा व्यक्ति समाज में अलग से पहचाना जाता है। जातक को सरकारी सर्विस मिलने की सर्वाधिक संभावना रहती है छोटे स्तर से कार्य आरम्भ करके भी व्यक्ति अपनी पहचान बनाने में सफल रहता है। ऐसे लोगों में गजब की पूर्वाभास शक्ति रहती है। क्रूर ग्रहों की दृष्टि पड़ने पर ऐसे लोग थोड़ा जिद्दी स्वभाव के हो जाते हैं। सूर्य कमजोर हो तो हृदय संबंधी विकार उत्पन्न होने की संभावना रहती है।

द्वितीय भाव
जन्म कुंडली के इस भाव में इस सूर्य की स्थिति जातक के लिए मिले जुले फल प्रदान करने वाली होती है। स्वास्थ्य की दृष्टि इन्हें दाहिनी आंख तथा सर्वाइकल से संबंधित बीमारियों की संभावना रहती है। जातक को सभी भौतिक सुख प्राप्त होते हैं किंतु पारिवारिक कलह और मानसिक अशांति के कारण कोई न कोई उलझन बनी रहती है। यदि सूर्य के साथ पाप ग्रह हों अथवा पाप ग्रहों की दृष्टि हों तो ऐसे लोग जिद्दी और कटु भाषा का प्रयोग करने वाले होते हैं। अध्यात्म की ओर झुकाव रखने वाले लोगों के लिए इनका फल अति शुभ रहता है।

तृतीय भाव
किसी भी जातक की जन्मकुंडली में यदि सूर्य तृतीय भाव में हों तो ऐसा व्यक्ति अदम्य साहसी और पराक्रमी होता है। अपनी ऊर्जा शक्ति के बलपर कठिन से कठिन हालात को नियंत्रित कर लेता है। उसके द्वारा लिए गए निर्णय और किए गए कार्यों की सराहना भी होती है। बड़े भाई का सुख कम रहता है या तो होते नहीं और होते भी हैं तो कोई न कोई विवाद रहता है। ऐसे लोग कठोर निर्णय लेने वाले कुशल प्रशासक तथा जनप्रिय होते हैं। समाज के प्रति इनका समर्पण भाव इन्हें और लोगों से अलग पंक्ति में खड़ा करता है।

चतुर्थ भाव
जिनकी जन्म कुंडलियों में सूर्य देव चतुर्थ भाव में रहते हैं ऐसे लोग माता-पिता में से किसी एक के सुख-सहयोग से वंचित रहते हैं। मित्रों तथा संबंधियों के द्वारा ऐसे लोग शोषित होते हैं और कहीं न कहीं धोखे का शिकार भी होते हैं। कर्ज के लेन-देन के मामलों में भी ऐसे लोगों को सावधान रहना चाहिए। यदि शुभ ग्रह साथ हों अथवा इनकी दृष्टि भी पड़ जाए तो ऐसे लोगों को राजकीय शिष्टाचार और अपने द्वारा अर्जित वैभव तथा सम्मान प्राप्त होता है। मकान-वाहन का पूर्ण सुख मिलता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इन्हें भी हृदय विकार से सावधान रहना चाहिए।

पंचम भाव
जिनकी जन्म कुंडली में सूर्य पांचवे भाव में विराजमान हों ऐसे लोग अल्पसंतान वाले होते हैं किंतु इनकी संताने कुलदीपक होती हैं। शिक्षा प्रतियोगिता  में अपने खानदान का नाम ऊँचा करती हैं। शोधपरक तथा आविष्कार करने वाले क्षेत्रों में ऐसे लोग पूर्ण सफल रहते हैं। समाज में पद प्रतिष्ठा के साथ-साथ नेतृत्व की भी जिम्मेवारी मिलती है। चुनाव संबंधी किसी मामले में भी ऐसे लोग पूर्ण सफल रहते हैं। सूर्य की पाप ग्रहों से युति अथवा दृष्टि शिक्षा के क्षेत्र में रुकावटों का संकेत तो देती ही है ऐसे में लोग गलत संगति का शिकार भी हो सकते हैं।

छठा भाव
इस भाव में सूर्य अति प्रभावशाली ग्रह माने गए हैं। ऐसा व्यक्ति महापराक्रमी उच्चकार्य करने वाला, सफल उद्यमी होता है। सूर्य के शुभ प्रभाव के फलस्वरूप ऐसे लोग नौसेना अथवा प्रशासनिक सर्विस में उच्च पदों तक पहुंचते हैं। इनमें गजब की नेतृत्व शक्ति होती है। संगठनात्मक कार्यों में  भी ऐसे लोग अपनी अलग पहचान बनाते हैं। कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है और शत्रुओं पर हमेशा हावी रहते हैं। मानसिक रूप से पूर्ण मजबूत रहते हुए ऐसे लोग जीवन में आने वाली कठिनाइयों एवं संघर्षों पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त करते हैं।

सप्तम भाव
जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य सप्तम भाव में रहते हैं ऐसे लोगों को दांपत्य जीवन में कहीं न कहीं कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है, एक से अधिक विवाह का योग भी बनता है। कार्य-व्यापार के क्षेत्र में ऐसे लोगों के खिलाफ कोई न कोई षड्यंत्र भी चलता रहता है। कई बार देखा  गया है कि कोर्ट कचहरी के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। घूमने फिरने के शौकीन ऐसे लोग उच्चाधिकारियों एवं शासन सत्ता से लाभ उठाने में सफल  रहते हैं। सूर्य की अशुभ ग्रहों की युति हो अथवा दृष्टि हो तो ऐसे लोगों को साझा व्यापार करने से बचना चाहिए।

अष्टम भाव-
जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य अष्टम भाव में हो उनके जीवन में अलग-अलग तरह के मिले-जुले फल दिखाई देंगे। स्वास्थ्य की दृष्टि से इन्हें अग्नि, विष तथा दवाओं के रिएक्शन का खतरा बना रहता है किन्तु आयु लम्बी होती है। इस भाव में बलवान सूर्य जातक को प्रतापी बनाते हैं। अपने स्वयं के बलपर ऐसा व्यक्ति यश और कीर्ति प्राप्त करता है। गूढ़ विषयों में रूचि रखने वाला ऐसा जातक आध्यात्मिक क्षेत्र में अच्छी सफलता अर्जित करता है। परिवार के लिए समर्पित होता है किंतु परिवार वाले उसकी भावना समझ नहीं पाते।

नवम भाव
जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य नवम भाव में विराजमान रहते हैं ऐसे लोग तीक्ष्ण बुद्धि रखने वाले, कार्य व्यापार में पूर्ण सफल रहने वाले, स्वअर्जित धन का सदुपयोग करने वाले, प्रखर वक्ता तथा कठिन साधनाओं की ओर अग्रसर रहने वाले होते हैं। धर्म-कर्म के मामलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और दान पुण्य भी करते हैं। इनके जीवन में माता-पिता से दूर रहने अथवा विदेश प्रवास का योग निरंतर बना रहता है, ऐसे लोगों को विदेशी नागरिकता बड़ी सहजता से मिल जाती है। अशुभ ग्रहों की युति अथवा दृष्टि भी हो ऐसे लोगों में अहंकार अधिक आ जाता है।

दशम भाव
जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य दशम भाव में रहते हैं ऐसा व्यक्ति राजसत्ता का पूर्ण सुख भोगता है। विदेशी कंपनियों में भी ऐसे लोग उच्चपदों पर आसीन होते देखे गए हैं। जातक कई तरह के कार्य-व्यापार करके समाज में मान प्रतिष्ठा पाता है। ऐसे व्यक्तियों के जन्म के समय से पिता ही के जीवन में सफलताओं का सिलसिला तेजी से बढ़ जाता है। धर्म शास्त्रों में पारंगत ऐसा व्यक्ति राजनीतिज्ञों तथा समाजसेवियों के रूप में भी अच्छी प्रतिष्ठा पाता है। सूर्य की अशुभ ग्रहों के साथ युति अथवा दृष्टि इनके कार्य में बाधा तो लाती है किंतु ऐसे लोग अंततः सफल ही रहते हैं।

एकादश भाव-
जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य एकादश भाव में रहते हैं ऐसे व्यक्तियों के जीवन में ये वरदान की तरह फल देते हैं जातकों को धनवान तो बनाते ही हैं शिक्षा प्रतियोगिता में भी पूर्ण रूप से कामयाब करते हुए सूर्य ऐसे लोग को अपने कार्य व्यापार में भी मनोनुकूल सफलता हासिल कराते हैं। सरकार  द्वारा घोषित पुरस्कार प्राप्ति की भी संभावना रहती है। जातक शत्रु मर्दी होता है और कोर्ट कचहरी के मामलों में विजयश्री प्राप्त करता है। हो सकता है कि बड़े भाइयों के सुख अथवा सहयोग से वंचित रहना पड़े किंतु शुभचिंतकों की संख्या अधिकाधिक रहती है।
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बारहवें भाव
जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य बारहवें भाव में रहते हैं ऐसे लोगों को जीवन में काफी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इन्हें बाई आंख से संबंधित रोग तथा शरीर में कैल्शियम की कमी ना हो इससे सावधान रहना चाहिए।  कई बार देखा गया है कि ऐसे लोगों को दांपत्य जीवन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इन्हें विदेशी कंपनियों में सर्विस हेतु प्रयास करना अथवा विदेशी नागरिकता हासिल करके उस देश में भाग्य आजमाना ज्यादा सफलता दायक रहता है।
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