पंडित शर्मा ने बताया की शास्त्रों के अनुसार एक माह के मध्य दो या दो से अधिक ग्रहण पड़ जाए तो राजा को कष्ट, सेना में विद्रोह, गम्भीर आर्थिक समस्या, जैसी स्थिति निर्मित होती है। संहिता ग्रंथो में स्पष्ट उल्लेख है की यदि यह स्थिति आषाढ़ माह में बने तो आजीविका पर मार तथा चीन आदि देशों को नुक्सान के योग बनते हैं। तीनों ग्रहण का प्रभाव विश्व के लिए नुक्सान दायक रहेगा। चीन को लेकर वैश्विक स्तर पर कोई कठोर निर्णय पूरे विश्व को शीत युद्ध की और ले जा सकता है। कुल मिलाकर जून-जुलाई वायरस से अधिक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता, अमेरिका-चीन के मध्य मतभेदों को लेकर परेशानी का कारण बन सकता है।
शनि जयंती के शुभ अवसर पर कोकिलावन शनि धाम में चढ़ाएं 11 किलों तेल और पाएं अष्टम शनि ,शनि की ढैय्या एवं साढ़े - साती के प्रकोप से छुटकारा
कब होगा कंकणाकृति सूर्य ग्रहण का स्पर्श-मध्य और मोक्ष
आचार्य पंडित रामचन्द्र शर्मा वैदिक के अनुसार यह ग्रहण उत्तरी राजस्थान, पंजाब, उत्तरी हरियाणा, उत्तराखंड के कुछ भागों में कंकणाकृति तथा शेष भारत में खंड ग्रास के रूप में दिखाई देगा, इंदौर तथा उज्जैन में ग्रहण का स्पर्श (प्रारंभ) प्रातः 10.10., मध्य 11.51 और मोक्ष (समाप्ति) दोपहर 01.42 पर होगा। ग्रहण का सूतक दिनांक 20 जून को रात्री 10.10. पर प्रारंभ होगा।
भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्यों से वीडियो कॉल पर करें बात और पाएं समाधान
आने वाले कुछ समय में एक के बाद एक पांच ग्रह अपनी चाल बदल कर वक्री होकर देश-विदेश में अपना कहर बरपा सकते हैं। राहू मिथुन राशि में वक्री है, वही 11 मई को शनि तथा 14 मई को गुरु मकर राशि में वक्री होंगे। वही 13 मई से शुक्र भी इन वृषभ राशि में वक्री होंगे वही इन चारो वक्री ग्रहों के साथ आग में घी का कार्य करने के लिए बुध 18 जून से मिथुन राशि में वक्री होंगे।
भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्यों से वीडियो कॉल पर करें बात और पाएं समाधान
क्या होता है वक्री ग्रहों का प्रभाव
भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान के प्रमुख आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया की संहिता ग्रंथानुसार यदि कोई ग्रह अपनी नैसर्गिक गति से विपरीत उल्टी तरफ बड़ते है तो उसे वक्री कहा जाता है। हालांकि राहू केतू की नैसर्गिक चाल वक्र ही है। पंडित शर्मा ने बताया की आने वाले जून-जुलाई काफी कष्टकारी हो सकते है। पांच ग्रहों का वक्री होना जनजीवन को अस्तव्यस्त कर सकता है। दो प्रमुख ग्रह शनि और गुरु का एक साथ मकर राशि में वक्री होना, पश्चिमी देशो में उथल पुथल मचा सकता है। मकर राशि शनि की स्वराशी है और गुरु की नीच राशि है। दोनों ग्रहों की आपसी द्वन्द की भेट चढ़ सकती है विश्व की अर्थ व्यवस्था। स्टॉक मार्केट में रिकार्ड गिरावट देखने को मिल सकती हैं। पांचो ग्रह तीन राशि को प्रभावित कर सकते है, वृषभ, मिथुन और मकर राशि होंगी प्रभावित। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है वर्षेश बुध का अपनी राशि मिथुन में वक्री होना, वायु तत्व राशि मिथुन में बुध का वक्री होने से संक्रामकता अपने चरम स्तर पर पहुंच सकती है। प्राकृतिक आपदा और संक्रामक बिमारी के बढ़ने के संकेत भी प्राप्त हो रहे हैं।
शनि जयंती के शुभ अवसर पर कोकिलावन शनि धाम में चढ़ाएं 11 किलों तेल और पाएं अष्टम शनि ,शनि की ढैय्या एवं साढ़े - साती के प्रकोप से छुटकारा