जब चंद्रमा गोचर करते समय वह कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है तो उस कालखंड में पंचक लगता है।
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4 अगस्त, मंगलवार से पंचक शुरू हो रहा है। हिंदू धर्म में पंचक का विशेष महत्व होता है। मुहूर्त ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती ये नक्षत्र पर जब चन्द्रमा गोचर करते हैं तो उस काल को पंचक काल कहा गया है। 4 अगस्त से पंचक शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा। मंगलवार के दिन पंचक लगने से यह अग्नि पंचक कहलाएगा। पंचक का उत्तर और पूर्व भारत में भदवा भी कहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक पंचक काल में कुछ कार्य करने को वर्जित माना गया है।
जब चंद्रमा गोचर करते समय वह कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है तो उस कालखंड में पंचक लगता है। पंचक में घास फूस इकठ्ठा करना, लकड़ी आदि ईंधन एकत्रित करना, पलंग बनाना- चारपाई बनाना, छप्पर बनाने जैसा कार्य नहीं करना चाहिए। इससे अग्नि का भय रहता है। इस काल में दक्षिण दिशा की यात्रा भी वर्जित मानी गई है। चन्द्र जब रेवती नक्षत्र गोचर कर रहे हों तो उस समय बनने वाले मकान की छत नहीं डालनी चाहिए, इससे पारिवारिक कलह, बड़े सदस्य का स्वास्थ्य खराब रहने तथा धन हानि की संभावना अधिक रहती है।
पंचक के प्रकार
रोग पंचक
रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहते हैं। रोग पंचक के दौरान पांच दिन तक शारीरिक और मानसिक परेशानियां रहती है। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ कार्य आरंभ नहीं किया जाता। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।
राज पंचक
सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।
अग्नि पंचक
मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है।
चोर पंचक
शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के लेन-देन से बचना चाहिए। बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक सभी तरह के कार्य कर सकते हैं यहां तक कि सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।