शादी से पहले कन्या निरीक्षण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कन्या के शुभ गुण और लक्षण देखने के लिए मुखरे के साथ ही उनके पैर और चाल को भी देखा जाता है। लेकिन शास्त्रों में केवल महिलाओं के लिए ही नहीं पुरूषों के लिए भी शुभ गुण लक्षण बताये गये हैं।
इसलिए सिर्फ कमाई देखकर नहीं उनके भी अंग लक्षण देखकर शादी करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि सिर्फ धन से गृहस्थी नहीं चलती है इसके लिए लड़के का अच्छा स्वभाव और गुणवान होना भी जरूरी होता है। जिस तरह लड़कियों की चाल और पैरों से उनके गुण पता चलते हैं उसी प्रकार लड़कों के पैर देखकर भी उनके गुणों को जाना जा सकता है।
भविष्य पुराण के ब्राह्मपर्व में ब्रह्माजी कार्तिकेय से कहते हैं कि जिस पुरूष के पैर कोमल, मांसल, लालिमा लिये हुए हों और पैर की नाड़ियां नहीं दिखाई देती हों वह भाग्यशाली होता है। ऐसा व्यक्ति राजा के समाज वैभवपूर्ण जीवन जीता है।
जिनके पैर के तलवे में अंकुश का चिन्ह होता है वह सदा सुखी रहते हैं और अपने परिवार को भी सुख देते हैं। जिन पुरूषों के पैर कछुए की पीठ के समान ऊंचे उठे होते हैं और उंगलियां एक दूसरे से सटी हुई होती हैं तथा पसीने कम आते हैं वह भी सुखमय जीवन जीते हैं।
भविष्य पुराण में ऐसे व्यक्ति को राजा के समान वैभव प्राप्त करने वाला माना गया है। जिनके पैर की उंगलियां एक दूसरे हटी हुई होती हैं वह जीवन में बार-बार दुख प्राप्त करते हैं और इन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इससे परिवार के लोगों को भी कष्ट उठाना पड़ता है।
जिनके पैर आग में पके हुए मिट्टे के रंग के समान होते हैं वह क्रोध में ऐसे काम कर जाते हैं जिसके लिए बाद में इन्हें पछताना पड़ता है। जिनके पैरों का रंग पीलापन लिये होता है उनमें काम की भावना अधिक होती है। परस्त्री के प्रति यह जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। पैरों का रंग कालापन लिए होना बताता है कि व्यक्ति मदिरा का सेवन करने वाला होगा।