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मंगल का राशि परिवर्तन: आज सेनापति मंगल का मीन राशि में प्रवेश, मचा सकते हैं कोहराम

Thu, 18 Jun 2020 10:41 AM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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मंगल का राशि परिवर्तन
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अदम्य साहसी तथा पराक्रमी ग्रह पृथ्वी पुत्र मंगल आज शाम 8 बजकर 13 मिनट पर बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश कर रहे हैं। इस राशि में मंगल 16 अगस्त सायं 6 बजकर 29 मिनट तक विराजमान रहेंगे उसके बाद अपनी स्वयं की राशि मेष में प्रवेश करके रूचक योग का निर्माण करेंगे। मेष राशि में ही मंगल 10 सितंबर की मध्यरात्रि पश्चात 3 बजकर 48 मिनट पर वक्री होंगे और उसी अवस्था में पुनः 4 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 4 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। पुनः मीन राशि पर ये 24 दिसंबर सुबह 10 बजकर 14 तक भ्रमण करेंगे उसके बाद मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जहां पर 22 फरवरी तक विद्यमान रहेंगे। फलित ज्योतिष में मंगल, शनि और केतु को पाप ग्रह माना गया है इसीलिए इनके वक्री या मार्गी होने का सर्वाधिक महत्व रहता है राहू-केतु तो सदैव वक्री ही रहते हैं।

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वर्तमान समय में मंगल का मीन राशि में प्रवेश मेदिनी ज्योतिष के लिए उसी तरह से उतार-चढ़ाव लाने वाला है जैसे सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश का प्रभाव रहता है अर्थात प्राकृतिक आपदा, आंधी तूफान, जल प्रलय तथा भूकंप आदि की घटनाएं अधिक से अधिक होंगी। मंगल दक्षिण दिशा के अधिपति माने गए हैं किंतु ये जिन राशियों के स्वामी हैं उनमें मेष पूर्व दिशा की और वृश्चिक उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करती है। यह दोनों राशियां आपस में षडाष्टक योग बनाती हैं इसलिए भारत के दक्षिण पूर्व भाग तथा दक्षिण पूर्व के देशों के लिए यह ग्रह-गोचर प्राकृतिक आपदा बाढ़, आंधी-तूफ़ान, भूकंप, आगजनी महामारी तथा अति वृष्टि की और संकेत डे रहा है।

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वर्तमान समय में जब सूर्य, चंद्र तथा मंगल को छोड़कर सभी ग्रह वक्री चल रहे हैं, जिनमें बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु तथा केतु सभी शामिल है तो विश्व समुदाय के लिए इतने ग्रहों का वक्री होना संपूर्ण पृथ्वी के लिए अति घातक सिद्ध होने वाला है। मंगल को नियंत्रित करने वाले बृहस्पति भी नीच राशिगत तथा वक्री हैं इनकी वक्री अवस्था 13 सितंबर तक रहेगी, किंतु ये 29 जून से अपनी धनु राशि में पुनः प्रवेश करके मंगल के आक्रामक स्वभाव पर कुछ लगाम लगाएंगे। इसीलिए 29 जून तक भारत के दक्षिणी भाग, दक्षिण पूर्व, तथा उत्तर के क्षेत्र तथा देशों के लिए समय अनुकूल नहीं है उन देशों में भी अग्निकांड, भूकंप एवं अतिवृष्टि से जनजीवन और असामान्य रहेगा। इन छः ग्रहों में वक्री बृहस्पति उत्तर पूर्व, शुक्र पूर्व, शनि पश्चिम ,राहु दक्षिण पश्चिम, केतु पश्चिम उत्तर, के देशों के लिए अति खतरनाक समीकरण रहे हैं पृथ्वी के इन भागों में उपरोक्त सभी आपदाएं,अशांति और जनाक्रोश जैसा माहौल रहेगा।
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जैसा कि आप जान रहे हैं इन्हीं ग्रहों के दुष्प्रभाव स्वरूप संपूर्ण पृथ्वी कोरोनावायरस से ग्रसित है जिससे अभी मुक्ति की आशा नहीं की जा सकती। भारतवर्ष के लिए मंगल का मीन राशि में प्रवेश तथा 16 अगस्त से मेष राशि में प्रवेश प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से तो अनुकूल नहीं रहेगा किंतु भारत की सैन्य ताकत बढ़ेगी तथा शीर्ष नेतृत्व युद्ध के और भी अस्त्र-शस्त्र के सामान खरीदने में अति धन व्यय करेगा। वर्तमान परिस्थितियों में बृहस्पति का कमजोर होना मंगल को स्वतंत्र निर्णय लेने अथवा अपने स्वभाव के अनुरूप परिणाम दिखाने के लिए खुली छूट दे रहा है, अतः इस समय देश के नागरिकों को हर कार्य तथा निर्णय बहुत सावधानी पूर्वक लेने होंगे अपने स्वभाव में आई उग्रता को नियंत्रित करना होगा। प्राकृतिक आपदाओं से भी निपटने अथवा बचने के लिए प्रयत्न करने होंगे। यह सिलसिला 13 सितंबर तक जारी रहेगा उसके बाद बृहस्पति के मार्गी होते ही सभी प्राकृतिक घटनाओं में कमी आएगी।

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