आज बात करते हैं काल पुरुष की कुंडली की दूसरी लग्न के बारे में जोकि वृषभ लग्न है। लग्न के महत्व के बारे कहा गया है कि जैसे वृक्ष के बिना फल-पुष्प-पत्र एवं पराग प्रक्रियाओं की कल्पना व्यर्थ है। उसी प्रकार लग्न के बिना अन्य भावों की कल्पना एवं फल कथन प्रक्रिया भी व्यर्थ है। अत: जन्मपत्रिका फल कथन में बीजरूप लग्न ही है। अब लग्न के महत्व को समझते हुए वृषभ लग्न के बारे में जानते हैं।
वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र है, शुक्र ऐश्वर्यशाली व विलासपूर्ण ग्रह है। इस लग्न वाले जातक प्राय: गौरवर्ण के, दिखने में सुन्दर व आकर्षक व्यक्ति होते हैं, इस लग्न का चिन्ह वृषभ (बिना जोता हुआ बैल) होने से शरीर पुष्ट, मस्त चाल, मजबूत जंघाएं, बैल के समान नेत्र, स्वाभिमान एवं स्वच्छंद विचरण एवं शीतल स्वभाव इनकी प्रमुख विशेषता कही जा सकती है।
यह स्थिर स्वभाव की राशि होती है और इसी कारण इस राशि में ठहराव देखने को मिलता है। इस लग्न के लोगों को जल्दबाजी पसंद नहीं होती है। यह पृष्ठोदय राशि है अर्थात आगे से उठने वाली राशि है। यह राशि पृथ्वी तत्व के अन्तर्गत आती है।
आपको अपने जीवन में बहुत जल्दी-जल्दी बदलाव पसंद नहीं होगा। इसलिए आप आसनी से स्थान परिवर्तन नहीं करते हैं। एक ही जगह पर बहुत समय तक बने रहते हैं। शुक्र का प्रभाव होने से आप सौन्दर्य प्रेमी होते हैं। आपको सुंदर और कलात्मक चीजें पसंद होती है। आप स्वभाव से रोमांटिक भी होते हैं।
वैसे तो आपको क्रोध कम आएगा लेकिन जब आएगा तब अत्यधिक आएगा, तब आपको शांत करना सरल नही होगा। आप स्वभाव से उदार हृदय होते हैं लेकिन आप एकांतप्रिय होंगे। आपको ज्यादा भीड़ भाड़ कम ही पसंद होगी। आप जीवन में धन कमाने की इच्छा रखते हैं और धन एकत्रित करने में सफल भी होते हैं।
सामान्यतः वृषभ लग्न में उत्पन्न जातक सुंदर, उदार स्वाभाव के होते हैं, उनकी वाणी में भी मधुरता का भाव विद्यमान रहता है। साथ ही व्यक्तित्व भी आकर्षक होता है तथा अन्य जनों को प्रभावित करने में वे समर्थ रहते हैं। शारारिक रूप से वृषभ लग्न के लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है तथा परिश्रम करने की उनकी अपूर्व क्षमता रहती है जिससे जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने तथा सुखैश्वर्य एवं वैभव अर्जित करने में प्रायः सफल रहते हैं।