ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को सेनापति का दर्जा दिया गया है। इन्हें साहस, पराक्रम, ऊर्जा, शौर्य और भूमि-भवन का कारक ग्रह माना जाता है। यदि बात की जाए रिश्तों पर प्रभाव की तो इनका संबंध भाई के रिश्ते से माना गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल शुभ स्थिति में होता है इसे स्थाई संपत्ति यानी भूमि-भवन की प्राप्ति होती है साथ ही व्यक्ति में ऊर्जा, साहस और पराक्रम देखने को मिलता है। इसी के साथ व्यक्ति के भाई-बहनों के साथ संबंध मजबूत रहते हैं। इसके अलावा यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह शुभ न हो तो क्रोध की अधिकता, कोर्ट-कचहरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मंगल की अशुभता के कारण जातक का भाईयों से झगड़ा बना रहता है व पति-पत्नी के बीच भी सामंजस्य की कमी होने लगती है। अगर किसी की कुंडली में मंगलदोष लगा हो तो उसके विवाह में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। विवाह हो भी जाता है तो दांपत्य जीवन में कलह, कानूनी परेशानियां यहां तक की जीवन साथ के साथ संबंध विच्छेद होने की भी आशंका बनी रहती है। यदि किसी की कुंडली में मंगलदोष हो तो उसके अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए ज्योतिष में महत्वपूर्ण उपाय बताए गए हैं। तो आइए जानते हैं कि मंगलदोष कैसे लगता है और क्या हैं इसकी अशुभता से बचने के उपाय।