सूर्य की तरह चंद्रमा भी प्रत्यक्ष देवता हैं। वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से यदि देखें तो चंद्रमा नौ ग्रहों के क्रम में सूर्य के बाद दूसरा ग्रह है। इसे मन, माता, मानसिक स्थिति, मनोबल, यात्रा, सुख-शांति, धन-संपत्ति, आदि का कारक माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से देखें तो भगवान शिव ने उन्हें अपने सिर पर धारण किया हुआ है। उन्हें जल तत्व का देवता कहा गया है।
ज्योतिष के अनुसार मन में अत्यधिक बेचैनी रहना, मां का लगातार बीमार रहना, घर के जल स्रोतों का सूख जाना और मानसिक रूप से परेशान रहना आदि चंद्रदोष की निशानी है। कुंडली में चंद्र दोष के कारण जातक के घर में क्लेश, उसकी शारीरिक दुर्बलता, आर्थिक संकट जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में नहीं है तो आज कुछ सरल उपायों को करके चंद्रदेव की कृपा पा सकते हैं —