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सूर्य से लेकर केतु ग्रह तक, जानिए जीवन पर पड़ने वाले इसके शुभ-अशुभ असर

Tue, 19 Jun 2018 09:29 AM IST
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल का महत्व बहुत है। ग्रहों की शुभ और अशुभ चाल से व्यक्ति की कुंडली पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष में कुल 9 ग्रहों का अध्ययन करके व्यक्ति की कुंडली बनाई जाती है। जैसे-जैसे जातक की कुंडली में ग्रहों की दशा बदलती है उसी के अनुसार व्यक्ति को अच्छा और बुरा परिणाम मिलता है। अलग-अलग ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति पर पड़ता है। ग्रहों की चाल से व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव का पता लगाया जा सकता है।   
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सूर्य
सूर्य सभी 9 ग्रहों का राजा कहलाता है। जिस किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में होता है उसे मान-सम्मान और धन सम्पदा मिलती है। अगर सूर्य शुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति की समाज में प्रतिष्ठा मिलती है वहीं सूर्य अशुभ घर में बैठा होने पर व्यक्ति को अपमान और धन की हानि होती है।
चन्द्रमा
चन्द्रमा को मन का कारक कहा जाता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चन्द्रमा शुभ हो उसके जीवन में शांति रहती है। वहीं अगर कुंडली में चन्द्रमा अशुभ भाव में विराजमान हो तो व्यक्ति को मानसिक पीड़ा का कष्ट भोगना पड़ता है 
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मंगल
मंगल पराक्रम और क्रोध का प्रतीक माना गया है। अगर मंगल शुभ स्थान पर बैठा हो तो व्यक्ति बहुत पराक्रमी होता है और कुशल प्रबंधक बनता है। वहीं कमजोर मंगल होने पर व्यक्ति हमेशा डरा रहता है।  
बुध
बुध ग्रह बुद्धि का प्रतीक माना गया है। कुंडली में बुध ग्रह के शुभ होने पर व्यक्ति बुद्धिमान बनाता है। 
गुरु
गुरु ग्रह भाग्य का कारक है। यह भाग्य का निर्धारण करता है। कुंडली में गुरु के अशुभ होने पर काम में परेशानियां आती है।  मेहनत करने के बावजूद उसका उचिच फल नहीं मिलता।
शुक्र
शुक्र ग्रह सुख और सौंर्दय का कारक है। इसके शुभ होने से जातक को तमाम तरह के ऐशोआराम और संपन्नता मिलती है। वहीं शुक्र की अशुभ स्थिति जीवन में अंधकार होता है।
शनि
शनि को न्याय का ग्रह कहा गया है यदि किसी की कुंडली में शनि शुभ होता है तो वह ताकतवर और सभी सुखों को प्राप्त करने वाला होता है। शनि की अशुभ दृष्टि पड़ने पर जीवन में तमाम तरह की परेशानियां आती हैं।
राहू
कुंडली में शुभ राहु कठोर, प्रबल और तेज बुद्धि वाला बनाता है।  अगर राहु आपकी कुंडली में अशुभ फल देने लगे तो आपको हजारों तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। 
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केतु
कुंडली में केतु के प्रबल योग बनने पर व्यक्ति दयालु होता है वहीं केतु के अशुभ होने पर शत्रुता बढ़ती है।





 
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