फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ganadhip Sankashti Chaturthi 2021: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत के यह नियम अपनाएं, मिलेगा सुख समृद्धि का वरदान

Wed, 17 Nov 2021 01:12 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नयी दिल्ली

सार

मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी पूरे भक्ति भाव से गणपति की आराधना करता है, उसके जीवन के समस्त समस्याओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, और व्रत के नियम के बारे में- 
 
विज्ञापन
Ganadhip Sankashti Chaturthi 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रत्येक माह कि चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी आती है। इस दिन भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। जैसा कि सब जानते हैं गणेश देवताओं के अधिपति हैं इसलिए उनका पूजन सबसे पहले किया जाता है। प्रत्येक माह की संकाष्टि चतुर्थी को अलग अलग नाम से बुलाया जाता है। जैसे एकदंत संकष्टी चतुर्थी, अंगारकी संकष्टी चतुर्थी, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी आदि। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी पूरे भक्ति भाव से गणपति की आराधना करता है, उसके जीवन के समस्त समस्याओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, और व्रत के नियम के बारे में- 
विज्ञापन


 

Ganadhip Sankashti Chaturthi 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी आरंभ- 22 नवंबर 2021, सोमवार रात्रि 10: 26 मिनट से 
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी समापन- 24 नवंबर 2021, बुधवार मध्य रात्रि 12: 55 मिनट पर
चंद्रोदय का समय- 23  नवंबर, मंगलवार रात्रि 08:27 मिनट
विज्ञापन

Ganadhip Sankashti Chaturthi 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : amar ujala
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी  के व्रत नियम 
वैसे तो हर उपवास में सभी प्रकार के नियमों का पालन करना चाहिए और गणाधिप संकष्टी चतुर्थी में पूजा पाठ और व्रत के कुछ नियम है जो इस प्रकार हैं। 
  • सबसे पहले जो लोग गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं उन्हें ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करना अनिवार्य है। 
  • स्नान आदि के उपरांत स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। 
  • उसके बाद पूजा स्थल में जाकर व्रत का सकंल्प लेना चाहिए। 
  • गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के व्रत के दिन चावल, गेहूं और दाल का सेवन न करें, यह भी एक अनिवार्य नियम है। 
  • इस दिन व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। 
  • तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।  
  • क्रोध पर काबू रखें और खुद पर संयम बनाए रखें। 
  • गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी के मंत्रों के जाप के साथ श्री गणेश स्त्रोत का पाठ भी करें। 
  • गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण चंद्रोदय के पश्चात अर्घ्य देकर ही करें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें