सूर्य संक्रांतियों एवं छठ पूजा के अवसर पर सूर्य की उपासना बड़े विधि-विधान से की जाती है। सप्तमी तिथि भगवान सूर्य को अतिप्रिय है। छठ पूजा के दूसरे दिन सप्तमी को प्रातःकाल नदी या तालाब पर जाकर स्नान करके सूर्योदय होते ही अर्घ्य देना चाहिए। इस प्रकार सूर्य की उपासना से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर धन-धान्य एवं अच्छी संतान का सुख भोग मोक्ष को प्राप्त होता है।
इस विधि से दें अर्घ्य
शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक सप्तमी तिथि और रविवार को सूर्य की उपासना का नियम है। प्रातःकाल नहाकर उगते हुए सूर्य को जल देने के लिए तांबे के लोटे में जल,लाल चन्दन,चावल, लालफूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र- 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पुष्पांजलि अर्पित करना चाहिए। जल देते समय अपनी दृष्टि को कलश की धारा वाले किनारे पर रखेंगे तो सूर्य का प्रतिबिम्ब एक छोटे बिंदु के रूप में दिखाई देगा, एवं एकाग्रमन से देखने पर सप्तरंगों का वलय नजर आएगा।अर्घ्य के बाद सूर्यदेव को नमस्कार कर तीन परिक्रमा करें।ध्यान रहे कि जल के छींटे आपके पैरों पर न गिरें, इसे शुभ नहीं माना जाता है।
ये मिलता है फल
सूर्योपनिषद के अनुसार सूर्य की किरणों में समस्त देव,गंधर्व और ऋषिगण निवास करते हैं। सूर्य की उपासना के बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है,भले ही अमरत्व प्राप्त करने वाले देवता ही क्यों न हों। स्कंद पुराण में सूर्य को अर्घ्य देने के महत्व पर कहा गया है कि सूर्य को बिना जल अर्घ्य दिए भोजन करना भी पाप खाने के समान है एवं सूर्योपासना किए बिना कोई भी मानव किसी भी शुभकर्म का अधिकारी नहीं बन सकता है। सूरज नारायण को प्रातः अर्घ्य देकर नमस्कार करने से आयु,आरोग्य,धन धान्य,क्षेत्र,पुत्र,मित्र,तेज,वीर्य,यश,कांति,विद्या,वैभव और सौभाग्य आदि प्राप्त होता है एवं सूर्यलोक की प्राप्ति होती हैं। वैज्ञानिकों का कथन हैं कि उक्त विधि से प्रातःकालीन उगते सूर्य को जल अर्घ्य देने से व सूर्य को जल की धार में से देखने पर नेत्रों की ज्योति बढ़ती है।
छठ पूजा: संध्या अर्घ्य का समय
छठ पूजा का तीसरा दिन ( 10 नवंबर 2021)
(संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय: शाम 05 बजकर 30 मिनट पर
उषा अर्घ्य का समय
छठ पूजा का चौथा दिन(11 नवंबर 2021 )
सूर्योदय का समय: सुबह 06 बजकर 40 मिनट पर