अच्छी काली मिट्टी भी उपयुक्त है। भूमि चयन में हमें उन जमीनों का चयन करना चाहिए जो जमीनी स्तर थोड़ी ऊंचाई पर हों। यह जलभराव की स्थिति के प्रति संवेदनशील है, खेत में जल निकासी की व्यवस्था हो। मिट्टी का पीएच 8.5 होना चाहिए।
नाली और डोली पर 40 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए
बेहतर विकास के लिए एलोवेरा के पौधे जुलाई-अगस्त में लगाए जाते हैं। सिंचित स्थिति में पौधों को सर्दियों के महीनों को छोड़कर पूरे वर्ष लगाया जा सकता है। नाली और डोली पर 40 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए। छोटा पौधा 40 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए। रोपण घनत्व 50 हजार प्रति हेक्टेयर होगा और दूूरी 40 गुणा 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
एलोवेरा, राइजोम कटिंग व छोटे पौधे से प्रोपगैटेड किया जाता है। इसकी वंश वृद्धि के लिए भूमिगत राइजोम को खोदा जाता है। राइजोम को पांच-पांच सेंटीमीटर काटा जाता है, जिसमें न्यूनतम दो से तीन गांठें होनी चाहिए। अंकुरित होने के बाद इसे बेड या विशेष कंटेनर में लगाया जाता है। इसी तरह छोटे पौधे को मूल पौधे से अलग किया जाता है और 50 गुणा 45 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए।
राइजो कटिंग की लंबाई व छोटे पौधे की लंबाई 12 से 15 सेंटीमीटर होनी चाहिए। ध्यान रहे कि पौधे का दो तिहाई हिस्सा जमीन के अंदर हो। एक बार अंकुरित होने के बाद उनकी मुख्य खेत में रोपाई करें।