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प्राचीन मिस्र के लोग खतना को लेकर क्यों थे उत्साही?

Wed, 19 Jul 2017 01:38 PM IST
BBC
BBC Updated Wed, 19 Jul 2017 01:38 PM IST
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 Why were ancient Egyptians enthusiastic about circumcision?
Egypt

बीमार को ठीक करने के लिए फिल्मों में अक्सर डॉक्टर कहते हैं मरीज को अब दवा नहीं, दुआएं बचा सकती हैं। प्राचीन मिस्र में मरीज को बचाने के काम में दवाओं के साथ जादू भी शामिल रहता था। उस दौर में धर्म और विज्ञान को अलग करने वाली कोई लाइन नहीं थी। माना तो यहां तक जाता था कि बीमारियां देवताओं के दंड हैं और भीतर की बुरी आत्माओं को ताबीज और मंत्रों से दूर किया जा सकता है। लेकिन ये सब दवाओं के इस्तेमाल के साथ किया जाता था और उनके कुछ तरीके इतने वक्त बीतने के बाद भी बचे रह गए हैं।

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दुर्भाग्य से प्राचीन मिस्र की उपचार से जुड़ी काफी जानकारियां अब कहीं खो गई हैं। जैसे रॉयल लाइब्रेरी ऑफ एलेक्जेंड्रिया। ईसा पूर्व से तीन हजार साल पहले मिस्र की समृद्ध संस्कृति बेहद आधुनिक थी। उस दौर में मिस्र के लोग दवाओं को लेकर इतने आधुनिक थे कि आप चौंक सकते हैं।
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मिस्र में लाशों को ममी बनाकर रखे जाने की बात से आप वाकिफ ही होंगे। ममीफिकेशन यानी ममीकरण के जरिए प्राचीन मिस्र में लोगों ने मानव शरीर के बारे में अच्छी खासी जानकारी जुटा ली थी। तब मरने के बाद इंसान के शरीर को अंतिम सफर के लिए तैयार किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में मिस्रवासी शरीर के अंगों को देखने और बीमारियों को जान पाते थे जिसके चलते उनकी जिंदगी खत्म हुई। इस काम से वो कई बीमारियों को जानते हुए इस लायक बन सके कि किसी एक बीमारी को दुरुस्त करने के रास्तों को जान सके। इसमें खोपड़ी में छेद करने से लेकर ट्यूमर हटाने जैसे काम शामिल थे।

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 Why were ancient Egyptians enthusiastic about circumcision?
Egypt

मिस्र के लोग भले ही आटा बनाने के लिए गेहूं को साफ करने और पीसने के लिए काफी मेहनत करते थे लेकिन इसके बावजूद उनके खाने में कंकड़ और रेत के कण रहते थे। जाहिर है कि ऐसा खाना खाने से दांतों के बीच में गैप और इंफेक्शन रहेगा। काफी पुरानी मेडिकल पद्धति पेपर्स एबर्स के मुताबिक, ऐसे कई तरीके थे जिसके इस्तेमाल से ये गैप भरे जाने के साथ इंफेक्शन को दूर किया जा सकता था।

इनमें से एक तरीका ये बताता है कि दांत निकलने पर होने वाली खुजली के लिए एक हिस्सा जीरा, धूप सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी ही एक रेसिपी शहद को बताया गया है, जिसे मिस्र के लोग एंटीसेप्टिक यानी रोगरोधक के तौर पर इस्तेमाल करते थे। दूसरे कई मामलों में वो मलमल का इस्तेमाल भी करते थे।

प्राचीन मिस्र के लोगों को जिंदा और मृत दोनों लोगों के लिए नकली (कृत्रिम) अंगों की जरूरत पड़ती थी। हालांकि बाद के दिनों में ऐसे अंगों की ज्यादा जरूरत पड़ने लगी। मान्यता ये थी कि जिंदगी के बाद फिर से शरीर पाने यानी पुर्नजन्म के लिए लाश का पूरा होना जरूरी है। ममीफिकेशन में शरीर को पूरा करने पर सबसे अधिक जोर दिया जाता था। लेकिन तब के लोग आज ही की तरह कृत्रिम अंगों के मामले में जीवित लोगों की भी मदद करते थे।

 Why were ancient Egyptians enthusiastic about circumcision?
Artificial finger - फोटो : BBC

सबसे मशहूर कृत्रिम अंग थी उंगली। तस्वीर में दिख रही उंगली के बारे में मान्यता ये है कि एक महिला ने इसे इस्तेमाल किया था और ये सबसे पुराना कृत्रिम अंग है। इतिहास में दुनिया की कई पुरानी धार्मिक मान्यताओं और समाज में खतना किया जाता है। प्राचीन मिस्र में भी खतना किए जाने की परंपरा काफी फैली हुई थी।

ये कुछ इस कदर थी कि बिना खतना हुआ लिंग लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय था। इस बारे में भी लिखित में जानकारी मिलती है कि मिस्र के सैनिक कब्जे किए लीबियाई लोगों के लिए मुग्ध रहते थे। ये सैनिक ऐसे लीबियाई पुरुषों को अपने घर ले जाते थे ताकि उनके रिश्तेदार भी गुप्तांगों को देख सकें।

प्राचीन मिस्र में हेल्थकेयर बहुत सही तरीके से सरकार कंट्रोल कर रही थी। उस दौर में ऐसे कई मेडिकल इंस्टीट्यूट थे, जो डॉक्टरों को इलाज के लिए ट्रेनिंग देते थे। ये इंस्टीट्यूट मरीजों का इलाज भी करते थे। कई ऐसे मेडिकल मैन्यूल्स भी थे, जिसमें मरीजों के इलाज करने के तरीकों के बारे में लिखा जाता था। ऐसे भी विवरण मिले हैं, जिनमें किसी निर्माण स्थल पर मेडिकल कैंप्स लगाए जाते थे। इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि जब किसी निर्माण स्थल पर कोई हादसा हो जाता था, तब पीड़ित को कुछ भुगतान किया जाता था।

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