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जानें वो क्या वजह थीं जिसने मश्हूर बॉक्सर मोहम्मद अली को बनाया मुसलमान

Sat, 03 Jun 2017 03:10 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sat, 03 Jun 2017 03:10 PM IST
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know the real story of world famous boxer muhammad ali becoming a Muslim

अमेरीका के महान मुक्केबाज मोहम्मद अली ने सार्वजनिक रूप से 1964 में इस्लाम कबूल किया था। मोहम्मद अली के जीवन के लिए यह बेहद असाधारण कदम था। उनके आलोचक इस्लाम कबूल करने के फैसले से काफी नाराज थे। उनके गृह नगर के अखबारों ने अली के जन्म के वक्त का नाम कैसियस क्ले ही लिखना जारी रखा।

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अली ने वियतनाम युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इस कदम से उन्हें अपने खिताब और आजीविका से हाथ धोना पड़ा लेकिन अंत में उन्हें इन्हीं फैसलों ने एक मजबूत शख्स के रूप में स्थापित भी किया। मोहम्मद अली का निधन आज ही के दिन तीन जून 2016 को 74 साल की उम्र में हुआ था। अली ने इस्लाम कबूल करने की वजह बिल्कुल अलग बताई थी।
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1967 में जैक ओल्सेन ने 'ब्लैक इज बेस्ट: द रिडल ऑफ कैसिस क्ले' नाम से एक किताब लिखी थी। इस किताब में अली ने कहा है न्यूयॉर्क के हर्लेम सड़क किनारे उनकी पहली बार मुलाकात एक धर्म परिवर्तन कराने वाले से हुई थी।

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अली के मुसलमान बनने की कहानी कुछ और है

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अली ने बाद में कहा कि 1960 या 1961 की शुरुआत में मियामी में इस्लामिक देशों की बैठक थी और वहीं ऐसा हुआ। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा है कि उनकी पहली मुलाकात शिकागो में हुई। लेकिन इन सबसे अलग कैसिस क्ले यानी मोहम्मद अली के मुसलमान बनने की कहानी कुछ और है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि यह सबसे ज्यादा विश्वसनीय है। इसे टाइम पत्रिका ने अपनी वेबसाइट पर पब्लिश किया है।

'अली: ए लाइफ, आउट इन ऑक्टूबर फ्रोम हाटिन मिफलिन हरकोर्ट' नाम की एक किताब आने वाली है। इस किताब के लेखक जोनाथन ईग हैं। इस किताब में एक अंश में एक पत्र का जिक्र है जिसे अली ने अपनी दूसरी पत्नी खलिलाह कामाचो-अली को लिखा था। दुनिया के महान मुक्केबाज अली से कामाचो की शादी 1967-76 तक रही थी।

कामाचो अली ने कहा है कि उनके पूर्व पति ने यह पत्र 1960 के दशक में लिखा था। अली ने पत्र में लिखा है कि वह नेशन ऑफ इस्लाम अखबार में एक कार्टून देख रहे थे। वह अपने गृहनगर लुईवेल में स्केटिंग रिंग के बाहर थे।

वे जीजस की प्रार्थना भी करते हैं

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​कार्टून में दिखाया गया था कैसे गोरे दास मालिक क्रूरता से अपने दासों को मारते हैं और दूसरी तरफ वे जीजस की प्रार्थना भी करते हैं। इसका साफ संदेश था कि ईसाइयत गोरे दमनकारियों का धर्म है।

अली को यह कार्टून पसंद आया। अली ने लिखा है कि उस कार्टून का असर उन पर पड़ा और इसके बाद ही यह ख्याल आया। कामाचो अली ने मोहम्मद अली से विवाहेत्तर संबंधों को लेकर सवाल पूछा था। उन्होंने अली से इस मामले में एक पत्र लिखने को कहा था। कमाचो ने ही कहा था कि उन्हें क्यों इस्लाम के साथ जाना चाहिए।

कामाचो अली ने कहा कि वह इससे बड़ा हो सकते हैं। कामाचो ने टाइम से कहा, ''लेकिन आप अल्लाह से बड़ा नहीं हो सकते हैं। आपको आत्मावलोकन करना होगा। जब आप व्यभिचार करते हैं तो इसके परिणाम भी भुगतने होते हैं।''

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