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पाक सेना की योजना का हिस्सा है आतंकी संगठनों द्वारा नई राजनीतिक पार्टियां बनाना!

Sun, 17 Sep 2017 04:45 AM IST
amarujala.com- Presented by: देव कश्यप
amarujala.com- Presented by: देव कश्यप Updated Sun, 17 Sep 2017 04:45 AM IST
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political parties form by terror organizations is Part of the Pakistan Army strategies

पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय आतंकी हाफिज सईद की राजनीतिक पार्टी को भले ही पाक चुनाव आयोग (ईसीपी) ने मान्यता नहीं दी है लेकिन यहां अगले साल होने वाले आम चुनाव में कुछ आतंकवादी समूह बड़े स्तर पर राजनीतिक बैनर का लाभ उठाना चाहते हैं। इसके लिए लाहौर के वर्तमान संसदीय चुनाव में उन्होंने बाकायदा तैयारी भी शुरू कर दी हैं।

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आतंकी गुटों के राजनीति में भूमिका निभाने को लेकर वहां की सेना की रुचि होने की बात पाक सैन्य खुफिया विभाग के रिटायर्ड निदेशक ने स्वीकार की है। 
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आतंक से राजनीति में आने वाले ये गुट भारत के खिलाफ जबरदस्त दुष्प्रचार में जुटे हैं। इनमें एक गुट मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद के जमात-उद-दावा संगठन की मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) पार्टी है और दूसरा अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकी करार दिए गए फजलुर्ररहमान खलील का आतंकी गुट है।
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पाक सेना ने इन पर लगे आतंकवादी गुट के दाग मिटाने की योजना 2016 में बनाई थी, जिसके तहत उन्हें राजनीति में किस्मत आजमाने के लिए तैयार किया गया। यह खुलासा आईएसआई से अलग, पाक सेना के सैन्य खुफिया विभाग के पूर्व निदेशक जनरल शोएब ने किया।

रिटायर्ड जनरल शोएब के मुताबिक, सेना की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने पहली बार अप्रैल 2016 में राजनीतिक तौर पर इस योजना को आगे बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव आईएसआई के प्रमुख ने लिखित रूप से उनके साथ साझा किया था।

शोएब ने बताया कि आईएसआई प्रमुख ने खुद को खलील और सईद के साथ योजना के बारे में एक अनौपचारिक बातचीत भी की थी। मैंने जब सईद व खलील से बात की तो दोनों ही इस पर काफी सकारात्मक दिखाई दिए। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस प्रस्ताव के खिलाफ थे।

राजनीति में उतरे आतंकी भारत के खिलाफ उगल रहे जहर

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पाक सैन्य खुफिया विभाग के पूर्व निदेशक ने बताया कि तत्कालीन पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के अलावा उनके नजदीकी तीन और सदस्य पाक सेना की इस सैन्य योजना के जबरदस्त खिलाफ थे।

इन तीनों में से एक ने सेना के साथ तनाव भरी बैठक में हिस्सा भी लिया। शरीफ जमात-उद-दावा जैसे संगठनों को पूरी तरह से खत्म करने के पक्ष में थे। शरीफ के एक करीबी समर्थक के मुताबिक भारत के खिलाफ छद्मयुद्ध के लिए इन लड़ाकों के राजनीति में आने पर शरीफ और पाक सेना में जबरदस्त असहमति रही।

नवाज शरीफ को पाक सुप्रीम कोर्ट से अयोग्य करार देने के बाद लाहौर में संसदीय चुनाव के लिए चल रहे चुनाव प्रचार में मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) खुलकर मोर्चा संभाल रही है।

उसके अलावा अमेरिका द्वारा आतंकी करार दिए गए फजलुर्रहमान खलील भी राजनीतिक पार्टी बनाने में जुटा है। ये आतंकी गुट भारत के खिलाफ घृणित प्रचार करते हुए जनता की भावनाओं का लाभ उठाने की कोशिश में जुट गए हैं। चुनाव प्रचार में कहा जा रहा है कि - जो लोग भी भारत के दोस्त हैं, पाकिस्तान के गद्दार हैं, सिर्फ गद्दार। 

'आतंकवाद के दाग मिटाने के लिए खड़ी  की जा रही नई पार्टियां'

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पाकिस्तान में हाफिज सईद के जमात-उद-दावा चैरिटी संगठन और इसके आतंकी संपर्कों पर शोध कर चुके पाक विश्लेषक खालिद अहमद ने कहा कि नई राजनीतिक पार्टी स्पष्ट रूप से जनरलों द्वारा उन पर लगे आतंक के दाग मिटाने के विकल्प के रूप में खड़ी कराई जा रही हैं।

अहमद ने कहा कि यहां एक बात और महत्वपूर्ण है कि पाक सेना इन लोगों को हर हाल में जीवंत बनाए रखना चाहती है। जबकि दूसरी तरफ वह उन राजनेताओं को भी संतुलित करना चाहती है जो भारत के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए अधिक से अधिक इच्छुक हैं। 
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