फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   pakistani media approach on pm modi speech

पाकिस्तानी मीडिया की सुर्खियों में छाया पीएम मोदी का भाषण

Wed, 16 Aug 2017 12:57 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Wed, 16 Aug 2017 12:57 PM IST
विज्ञापन
pakistani media approach on pm modi speech
पीएम मोदी

लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कश्मीर समस्या को सुलझाने की दिशा में एक कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, 'कश्मीर समस्या न गाली से सुलझेगी और ना ही गोली से सुलझेगी, ये समस्या सुलझेगी तो सिर्फ हर कश्मीरी को गले लगाने से ही सुलझेगी।'

विज्ञापन


उनके इस बयान को पाकिस्तान और कश्मीर की मीडिया ने एक अच्छी शुरुआत के रूप में लिया है। 'जंग' ने 'मोदी सरकार को सही सलाह' शीर्षक के साथ अपना संपादकीय छापा है। अखबार लिखता है कि भारत सरकार पाकिस्तान से बातचीत करने से बच रही है जबकि इलाके में शांति और स्थिरता के लिए ये जरूरी है। 'जंग' ने ये भी लिखा है कि कश्मीर समस्या पर 13 सदस्यीय भारतीय संसदीय दल ने अपनी रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने के लिए कहा है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- लाल किले की प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें
विज्ञापन
विज्ञापन


अखबार ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार को कश्मीर में शांति की बहाली से कोई सरोकार नहीं है। कश्मीर के लोगों को बेहतर सुविधाएं चाहिए और सेना की ज्यादती लोगों को चुप नहीं करा सकती। बिना समय गंवाए कश्मीर की समस्या को सुलझाया जाना चाहिए।

पाकिस्तान से छपने वाले 'द न्यूज' और 'द नेशन' ने भी मोदी के बयान को सुर्खियां बनाकर छापा है। वहीं पाकिस्तान के अखबार 'डॉन' ने लिखा है कि 'आजाद कश्मीर' (यानी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर) के लगभग सभी शहरों में कल विरोध प्रदर्शन हुए और भारत प्रशासित कश्मीर के इलाकों में खासकर श्रीनगर में कर्फ्यू लगा रहा।

भारत कश्मीर को एक बार फिर से 'धरती का स्वर्ग' बनाना चाहता है।

pakistani media approach on pm modi speech
प्रतीकात्मक तस्वीर

इसी तरह 'पाकिस्तान टुडे' ने भी कश्मीर पर दिए मोदी के बयान को ही मुख्य खबर बनाया है। अखबार लिखता है कि भारतीय मीडिया मोदी के बयान को जम्मू और कश्मीर को लेकर उनकी नीति में परिवर्तन के संकेत की तरह देख रहा है। अखबार ने इस ओर भी ध्यान खींचा है कि चीन और पाकिस्तान के साथ विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ नहीं कहा।

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान के गायकों ने गाया भारत का राष्ट्रगान 'जन-गण-मन'

ग्रेटर कश्मीर ने अपने संपादकीय में लिखा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों देश अपनी आजादी की 70वीं सालगिरह मना रहे हैं। दोनों देशों की नींव रखने वाले हिंसा और विस्तारवाद के खिलाफ थे, लेकिन आज दोनों देश बड़ी बड़ी सेनाओं पर करोड़ों खर्च करते हैं।

'ग्रेटर कश्मीर' ने ये भी लिखा है कि अगर अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ पर दोनों देश तनाव में रहे और दोनों में आज की तरह मतभेद रहा तो ये दुर्भाग्यपूर्ण होगा। अगले 30 सालों में कोशिश की जानी चाहिए कि दोनों अपने संस्थापकों के पदचिन्हों पर चलें और उनके सपने को साकार करें।

इसी तरह घाटी से छपने वाले एक और अखबार 'राइजिंग कश्मीर' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि मोदी ने कश्मीरियों की तरफ अपना हाथ बढ़ाया है और पूरा भारत कश्मीर को एक बार फिर से 'धरती का स्वर्ग' बनाना चाहता है।

इससे पहले भी इस तरह के बयान आए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कोई काम नहीं हुआ है, लोग अब बातें नहीं सुनना चाहते। अखबार कहता है कि सरकार कश्मीर के लिए आर्थिक मदद की घोषणा बड़ी आसानी से कर देती है, लेकिन यहां से सेना हटाने और 'अफस्पा' जैसे कानून हटाने के मामले में अपने कान बंद कर लेती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed