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SAARC में भारत से मिली कूटनीतिक मात का बदला लेने की तैयारी में पाकिस्तान

Wed, 12 Oct 2016 09:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Oct 2016 09:29 PM IST
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 Pakistan try to seeks bigger Saarc to counter India influence
नवाज शरीफ

उड़ी हमले के बाद भारत द्वारा आतंकवाद के मुद्दे पर पाक को अलग-थलग करने की कूटनीतिक कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि पाक में होने वाले सार्क सम्मेलन का अफगानिस्तान, श्रीलंका और भूटान ने भी बहिष्कार कर दिया। पाकिस्तान इस किरकिरी से इस हद तक तिलमिला गया है कि उसने चीन, ईरान और मध्य एशियाई पड़ोसी देशों के साथ मिलकर सार्क देशों का एक नया गठजोड़ बनाने की योजना बनाई है।

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प्रतिष्ठित पाक अखबार ‘डॉन’ ने कूटनीतिक विशेषज्ञों के हवाले से खबर दी है कि पाकिस्तान वर्तमान सार्क सदस्य देशों पर भारत के नियंत्रण को चुनौती देना चाहता है और इसके लिए ग्रेटर दक्षिण एशियाई आर्थिक गठजोड़ बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है। अखबार के मुताबिक पाक संसदीय दल द्वारा पांच दिनी अमेरिका यात्रा के दौरान वाशिंगटन में यह विचार रखा गया। मीडिया से बात करते हुए सीनेटर मुशाहिद हुसैन सैयद ने भी चीन, ईरान और पड़ोस के मध्य एशियाई देशों के साथ ‘ग्रेटर साउथ एशिया’ के उदय की पुष्टि की।

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चीन को नहीं होगी कोई आपत्ति

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सैयद ने चीन-पाक आर्थिक कॉरिडोर को दक्षिण-मध्य एशिया को आपस में जोड़ने वाला मार्ग बताते हुए भारत से भी इस व्यवस्था में जुड़ने की अपील की। हालांकि ‘डॉन’ के मुताबिक भारत से इसके जुड़ने की संभावनाएं बहुत कम हैं, क्योंकि वह केवल उन सहूलियतों का फायदा उठाना चाहेगा जो उसे सार्क के तहत मिलती हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान के एक वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारी ने माना कि सार्क में भारत का हमेशा दबदबा रहेगा, क्योंकि बांग्लादेश और अफगानिस्तान के साथ भारत के मजबूत रिश्ते हैं, जबकि भूटान चारों तरफ भारत से घिरा है। मालदीव, नेपाल व श्रीलंका से पाक के अच्छे रिश्ते हैं लेकिन वे इतने बड़े नहीं कि भारत का विरोध कर सकें। इसलिए पाक को लगता है कि नई व्यवस्था के बाद भारत अपने फैसले उस पर नहीं थोप सकेगा।

‘डॉन’ अखबार ने कूटनीतिक विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि पाक के ‘ग्रेटर साउथ एशिया’ संबंधी विचार का वर्तमान सार्क देश शायद ही समर्थन करें। दरअसल बांग्लादेश, नेपाल व श्रीलंका को इसमें कोई खास रुचि इसलिए नहीं होगी क्योंकि उनके खुद के बंदरगाह हैं। अफगानिस्तान को इससे फायदा मिलेगा, लेकिन उसके पाक के बजाय भारत से ज्यादा अच्छे संबंध हैं। ईरान जैसे देश पहले से ही पाकिस्तान से नाराज हैं। इसके अलावा यदि किसी तरह पाक का यह विचार सार्थक हो भी जाता है तो जरूरी नहीं कि नये जुड़ने वाले देश भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ दें।
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नई व्यवस्था में चीन को कोई आपत्ति नहीं होगी

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पाक अखबार ‘डॉन’ ने वाशिंगटन के कूटनीतिक विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि ग्रेटर साउथ एशिया की नई व्यवस्था में चीन को कोई आपत्ति नहीं होगी। इसका सबसे बड़ा कारण है चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहे आर्थिक कॉरिडोर को सफल बनाना। अखबार के मुताबिक इन कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन भी क्षेत्र में बढ़ते भारत के दबदबे से परेशान है। चीन इस नई व्यवस्था के लिए ईरान और मध्य एशियाई देशों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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