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पाक नेताओं ने कहा एतिहासिक जीत है नवाज शरीफ की बर्खास्तगी

Fri, 28 Jul 2017 11:44 PM IST
amarujala.com- presented by: मोहित
amarujala.com- presented by: मोहित Updated Fri, 28 Jul 2017 11:44 PM IST
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Pakistan has won today by Nawaz Sharif's disqualification says Imran Khan 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा मामले में दोषी करार दे दिया गया है। फैसला आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तमाम तरह के प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

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पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख इमरान खान ने कोर्ट के फैसले को पाकिस्तान की जीत करार दिया है। फैसला आने के बाद देश को बधाई देते हुए इमरान ने कहा कि 'यहा पाकिस्तान के इतिहास  की सबसे बड़ी जीत है और यह एक नए युग की शुरुआत है।'
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उन्होंने आगे कहा कि 'मेरे नवाज के साथ कोई निजी मतभेद नहीं हैं। मैं बीते 40 साल से उनके परिवार को जानता हूं। बस उन्होंने देश के लोगों के साथ  गलत किया है जिसकी जवाबदेही उन्हें तय करनी होगी।'
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वहीं पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने कहा कि 'यह पाकिस्तान के लिए एतिहासिक दिन है, सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया। इसका सारा श्रेय चीफ जस्टिस, जांच कर रही पांच जजों की समिति और इमरान खान के आंदोलन को जाता है। इस फैसले के साथ नवाज शरीफ का करियर भी पूरी तरह समाप्त हो गया है।' 

गौरतलब है कि पनामा पेपर लीक मामले में फंसे नवाज शरीफ पर बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मामले में दोषी करार दिया है और उन्हें पीएम पद पर अयोग्य करार दिया गया है। जांच कर रही संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट पर अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के दोषी करार दिए जाने के बाद नवाज शरीफ ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया है।

जानिए क्या है पनामा लीक मामला

Pakistan has won today by Nawaz Sharif's disqualification says Imran Khan 

मध्य अमेरिकी देश पनामा की एक लॉ फर्म मोजैक फोनसेका ने अप्रैल, 2016 में 1.10 करोड़ दस्तावेज जारी कर पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था। इस लीक से नेताओं और उद्योगपतियों के बीच साठगांठ का पता चला। मालूम हुआ कि कैसे ‘टैक्स हैवन’ देशों में फर्जी कंपनियां खोलकर भ्रष्टाचार की काली कमाई खपाई जा रही है। इन दस्तावेजों में पाकिस्तान के बर्खास्त प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का भी नाम था।

- इस लीक के अनुसार नवाज की बेटी मरियम नवाज और बेटे हुसैन नवाज व हसन नवाज विदेशी कंपनियों और परिसंपत्तियों के मालिक हैं लेकिन परिवार के संपत्ति दस्तावेजों में इसे दर्शाया नहीं गया है।

- अब तक शरीफ परिवार की जिन कंपनियों की पहचान की गई हैं उनमें ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में पंजीकृत नेस्कॉल लिमिटेड, नील्सन इंटरप्राइजेज लिमिटेड और हैंगऑन प्रॉपर्टी होल्डिंग्स लिमिटेड। इन कंपनियों का पंजीकरण क्रमश: 1993, 1994 और 2007 में कराया गया।

- इन कंपनियों का इस्तेमाल पाकिस्तान में भ्रष्टाचार से कमाए धन से विदेश में परिसंपत्ति खरीदने में किया गया। इन परिसंपत्तियों में लंदन के पॉश इलाके मेफेयर के पाक लेन स्थित कई अपार्टमेंट्स भी हैं।

नवाज ने नकारे थे आरोप
5 अप्रैल, 2016 को प्रेस कांफ्रेंस में नवाज शरीफ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि यह उन लोगों की साजिश है जो राजनीतिक कारणों से उन्हें और उनके परिवार को निशाना बना रहे हैं। लंदन के फ्लैट कतर की एक कंपनी में निवेश से प्राप्त लाभ से खरीदे गए हैं। उन्होंने कहा था, ‘भ्रष्टाचार से कमाई दौलत से कोई भी शख्स अपने नाम प्रॉपर्टी नहीं खरीदता है।’

लंदन जाने से लगा कयासों का दौर
पनामा लीक के तुरंत बाद सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) में अफरातफरी का माहौल रहा। 13 अप्रैल, 2016 को मेडिकल चेकअप के नाम पर शरीफ के लंदन जाने से अफवाहों का बाजार गर्म हो गया था। यह कहा जाने लगा कि शरीफ अब नहीं लौटेंगे।

विपक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ एवं अन्य विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन उनकी याचिका यह कहकर खारिज कर दी गई कि नवाज शरीफ लगाए गए आरोप कयासबाजी पर आधारित हैं। उनका कोई आधार नहीं है।

- बहरहाल, पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ पर आरोपों की जांच के लिए पांच जजों की खंडपीठ गठित कर दी।
- इसके बाद कोर्ट ने आरोपों की विस्तृत जांच के लिए छह सदस्यों की एक ज्वाइंट इनवेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) का गठन किया जिसमें विभिन्न जांच एजेंसियों के नुमाइंदे शामिल किए गए थे। इसी जेआईटी की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया।
- लगभग 10 महीने तक चली सुनवाई में खंडपीठ ने हजारों पन्नों के दस्तावेजों की जांच की और दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी दलीलें सुनी। इस दौरान नवाज की बेटी मरियम की भी पेशी हुई और उन पर फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप लगा?

पहले भी घिरे थे शरीफ
- 1980 के दशक में भी नवाज शरीफ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इनकी जांच भी शुरू की गई थी लेकिन 1998 में सत्ता में आने के बाद शरीफ ने इसे यह कहते हुए बंद कर दिया कि सब कुछ राजनीति से प्रेरित था।
- वर्ष 2000 में टैक्स चोरी और भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें 14 साल की कैद और दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगा था। इसके अलावा 21 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई थी। इसके बाद उन्होंने राजनीतिक वनवास ले लिया और 2007 में पाकिस्तान लौटे।

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