पाकिस्तान का इस्लामिक स्टेट के खिलाफ बड़ा अभियान
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पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने कथित इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अफगानिस्तान सीमा से सटे उत्तर पश्चिम के इलाके में एक बड़ा अभियान शुरू किया है। पाकिस्तानी सेना के एक प्रवक्ता के मुताबिक इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने अफगानिस्तान के भीतर अपनी पकड़ बढ़ा ली है और उन्हें अपना प्रभाव बढ़ाने से रोकने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि वायुसेना के समर्थन से चलाए जा रहे ''खैबर 4'' नाम के अभियान के तहत खैबर एजेंसी की राजगल घाटी के पहाड़ी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पाकिस्तान ने इससे पहले अपनी जमीन पर इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी से इनकार किया था।
लेकिन अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के बढ़ते प्रभाव ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि पिछले दो सालों में दाएश ने पाकिस्तान में कई हमले करने का दावा किया है। सेना के प्रवक्ता लफ्टिनेंट जनरल आसिफ गफूर ने कहा है, "यह अभियान जरूरी था क्योंकि दाएश ने वहां पर अपनी जगह बना ली है और हमें राजगल घाटी के रास्ते पाकिस्तानी इलाके में आ रहे उसके असर को रोकना है।"
जनरल गफूर ने कहा कि इस इलाके में दाएश में शामिल लोगों में से अधिकतर पहले अफगान और पाकिस्तानी तालिबान के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने एक बार फिर पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी से इंकार किया है। उन्होंने कहा, "यहां उनकी कोई संगठित संरचना नहीं है और हम उन्हें यहां अपने पैर नहीं जमाने देंगे।"
उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान की बात करें तो वहां दाएश मजबूत होता जा रहा है, लेकिन हमें लगता है कि मध्य पूर्व में दाएश अकेला आतंकी समूह नहीं है।" उन्होंने कहा कि वर्तमान अभियान के तहत पहले राजगल घाटी के नजदीक की सीमाओं को पहले सुरक्षित किया जाएगा और उसके बाद बाकी इलाकों को खाली कराया जाएगा।
जनरल गफूर का कहना है कि सीमा के पार "एक से अधिक आतंकवादी" समूह हैं जिनका संबंध हाल में पाकिस्तान में हए हमलों से है। राजगल घाटी और खैबर एजेंसी संघ प्रशासित कबायली इलाकों का हिस्सा हैं जहां शासन की पकड़ थोड़ी ढीली है और इस्लामिक स्टेट खुद को मजबूत कर रहा है।
अफगानिस्तान के कुछ इलाकों पर इस्लामिक स्टेट का नियंत्रण है और साल 2015 से वो पाकिस्तान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। 2015 में उसके लड़ाकों ने पाकिस्तान में पहले हमले को अंजाम दिया था।
उस वक्त इस्लामिक स्टेट ने खुरासन शाखा की स्थापना की घोषणा की थी जो अफगानिस्तान और आसपास के इलाकों के लिए एक ऐतिहासिक नाम था। इसके साथ ही पहली बार इस्लामिक स्टेट ने अरब दुनिया के बाहर अपनी उपस्थिति होने की आधिकारिक घोषणा की थी।