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अफगानिस्तान में महिलाओं के वर्जिनिटी टेस्ट पर रोक की मांग
बीबीसी, हिन्दी
Updated Mon, 21 Aug 2017 06:10 PM IST
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अफगानिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने सरकार से महिलाओं पर किए जाने वाले वर्जिनिटी टेस्ट पर रोक लगाने की मांग की है। आयोग का कहना है कि इस तरह के परीक्षण से महिलाओं को मानसिक परेशानी पहुंचती है। आयोग ने इसे यौन हिंसा की श्रेणी में रखा है।
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वर्जिनिटी टेस्ट के दौरान यह जांचा जाता है कि महिलाओं का हायमन बरकरार है या नहीं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अफगानिस्तान में पुलिस अक्सर उन महिलाओं को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए भेजती है, जो अपने साथी के साथ चली जाती हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस परीक्षण से गुजरने वाली महिलाओं को सामाजिक कलंक समझा जाता है।
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मानवाधिकार आयोग की इस मांग पर पुलिस ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। अफगानिस्तान में वर्जिनिटी टेस्ट से उन सभी महिलाओं को गुजरना होता है जो किसी भी तरह के अनैतिक बर्ताव के आरोप में गिरफ्तार की जाती हैं। आयोग का तर्क है कि वर्जिनिटी टेस्ट महिलाओं की मर्जी के खिलाफ किया जाता है, इसलिए यह किसी यौन शोषण से कम नहीं है।
आयोग इसे मानवाधिकार हनन के रूप में भी देखता है। आयोग ने यह भी कहा है कि चिकित्सकीय दृष्टिकोण से हायमन का बरकरार रहना महिलाओं के कौमार्य होने का सबूत नहीं हो सकता। यह विभिन्न कारणों से नष्ट हो सकता है।
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आयोग ने एक सर्वे में इस तरह के परीक्षण से गुजरने वाली महिलाओं से बात की, जिसमें उन्होंने इसे अपमानित करने वाली प्रक्रिया बताया। महिलाओं ने इस कानून को मानसिक प्रताड़ना देने वाला बताया है। आयोग ने इस परीक्षण को अंतरराष्ट्रीय नीति के खिलाफ भी बताया है। संस्थान का कहना है कि वर्जिनिटी टेस्ट अक्सर पुरुष सुरक्षाकर्मी की मौजूदगी में किया जाता है।