फ्रांस: इमैनुएल मैक्रों की जीत के 5 कारण
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इमैनुएल मैक्रों तो जैसे फ्रांस की राजनीति में भूचाल ले आए हैं। एक साल पहले तक फ्रांस के इतिहास में सबसे अलोकप्रिय राष्ट्रपति की सरकार में एक मंत्री इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है।
39 साल की उम्र में वो फ़्रांस की मुख्यधारा की वामपंथी और उदारवादी पार्टियों को पछाड़कर फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव जीते हैं। मैक्रों को 66.06 फीसदी वोट मिले और उनकी धुर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी मरी ल पेन को 33.94 फीसदी वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
ये फ्रांस के इतिहास का नया अध्याय है- मैक्रों
क्या हैं उनकी जीत के पांच प्रमुख कारण
1.किस्मत का कमाल
इमैनुएल मैक्रों के जीवन का ये वो समय है जब वो फर्श से अर्श तक इतनी तेजी से पहुंचे हैं कि इसे किस्मत का चमत्कार माना जा सकता है। राष्ट्रपति पद की दौड़ की शुरुआत में रिपब्लिकन उम्मीदवार फ्रांस्वा फियो विवाद में फंसे, सोशलिस्ट उम्मीदवार बेनवा एमो से भी पार्टी के पारंपरिक वोटरों ने मुंह मोड़ लिया। पेरिस आधारित टेरा नोवा संस्था के मार्क ओलिविएर पैडिस के मुताबिक, "वो बहुत भाग्यशाली थे क्योंकि उनके सामने ऐसी स्थिति आ गई जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।"
सिर्फ किस्मत ही नहीं चतुराई भी काम आई
2. चतुराई
सिर्फ किस्मत ही नहीं चतुराई भी काम आई। वो सोशलिस्ट पार्टी की उम्मीदवारी के लिए लड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने समझ लिया था कि सालों से सत्ता में रही पार्टी के प्रति लोगों की निराशा के चलते पार्टी की आवाज़ आसानी से नहीं सुनी जाएगी। पैडिस कहते हैं, "जब कोई नहीं देख पा रहा था तब उन्होंने अपने लिए एक मौका देखा"।
हालांकि यूरोप में कई जगह राजनीतिक आंदोलन उठे जैसे स्पेन में पॉदेमॉस, इटली का फाइव स्टार मूवमेन्ट, लेकिन इनमें से कोई फ्रांस जैसा बड़ा राजनीतिक उलट-फेर करने में सफल नहीं हुआ। मैक्रों ने अप्रैल 2016 में जनशक्ति आधारित एन मार्शे आंदोलन की स्थापना की और चार महीने बाद फ्रांस्वा ओलांद की सरकार से इस्तीफा दे दिया।
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से प्रेरणा ली- मैक्रों
3. फ्रांस में एक नई शुरुआत की
पेरिस में एक स्वतंत्र पत्रकार एमिली श्कलथीस कहती हैं कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के 2008 के चुनाव प्रचार से प्रेरणा लेते हुए मैक्रों ने एन मार्शे की स्थापना की।उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने के लिए एन मार्शे के नौसिखिए कार्यकर्ताओं को तीन लाख घरों तक भेजा। इन कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ घर घर जाकर पर्चे बांटे बल्कि देश भर में 25 हजार विस्तृत (करीब 15 मिनट के) इंटरव्यू इकट्ठा किए।
इसके आधार पर तैयार किए गए डेटा पर चुनाव प्रचार में मुद्दों और नीतियों की प्राथमिकताएं तय की गईं। एमिली कहती हैं, "एक बहुत बड़ा समूह मैक्रों के लिए देश का मिजाज भांपने की कोशिश कर रहा था, ये भी सुनिश्चित किया गया कि समय रहते उनके आंदोलन से लोगों का संपर्क बनाया जाए. कार्यकर्ता कैसे हर दरवाजे तक जाएंगे, इसकी ट्रेनिंग दी गई।" इसका उन्होंने फायदा उठाया।
मैक्रों की राजनीतिक छवि भरी हुई है
4. सकारात्मक संदेश
कई विरोधाभासों से मैक्रों की राजनीतिक छवि भरी हुई है। राष्ट्रपति ओलांद के शिष्य, आर्थिक मंत्री, पूर्व इनवेस्टमेन्ट बैंकर जो एक जमीनी आंदोलन चला रहे हैं, एक उदारवादी नेता जिनके पास सरकारी तंत्र को सही करने के लिए एक योजना है।
उनकी प्रतिद्वंद्वी मरी ल पेन ने उन्हें समृद्धों का उम्मीदवार करार दिया था। लेकिन उन्हें एक और फ्रांस्वा ओलांद की तरह पेश करने वालों को मैक्रों ने सफल नहीं होने दिया। उन्होंने खुद को ऐसे नेता की तरह पेश किया जिसे बदलाव की चाह रखने वाले लोग समझ सकते हैं। मार्क ओलिविएर पैडिस कहते हैं, " फ्रांस में इन दिनों बहुत निराशा का माहौल है और वो एक आशा और सकारात्मकता का संदेश लेकर आए हैं। "
मैक्रों की चुनावी रैलियों में माहौल सकारात्मक था
5. वो मरी ल पेन के खिलाफ खड़े थे
मरी ल पेन नकारात्मकता झलका रहीं थी। वो अप्रवासन, यूरोपीय संघ और सिस्टम के खिलाफ खड़ी थीं। मैक्रों की चुनावी रैलियों में माहौल सकारात्मक था, चुनावी कार्यक्रमों में चमक-दमक भरी रोशनी, पॉप संगीत था वहीं मरी ल पेन के कार्यक्रमों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे, काफी सुरक्षा इंतजाम था और गुस्से का माहौल था।
कई लोग एक अस्थिर करने वाली और बांटने वाली धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रपति की संभावना से डरे हुए थे और मान रहे थे कि मैक्रों ल पेन का रास्ता रोक सकते हैं।