शांति, विकास के लिए एक-दूसरे का साथ जरूरी : मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तेज विकास को प्रोत्साहन देने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच एक मजबूत भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि इस संगठन ने सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है और अनिश्चितता की ओर जाती दुनिया में स्थिरता के लिए योगदान दिया है।
चीन के शियामेन शहर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि व्यापार और अर्थव्यवस्था ब्रिक्स से जुड़े पांचों देश - ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग की नींव है।
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उन्होंने विकासशील देशों की सार्वभौमिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी की स्थापना पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को लेकर सदस्य देशों के बीच मजबूत हिस्सेदारी, न सिर्फ विकास को प्रोत्साहन दे सकती है बल्कि पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सतत विकास के लक्ष्यों का समर्थन करने में भी मदद कर सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों से भी आग्रह किया कि वे अपनी क्षमताओं को अधिक मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष व समूह की आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था के बीच सहयोग को प्रोत्साहन दें। उन्होंने स्मार्ट शहरों, शहरीकरण और आपदा प्रबंधन में सहयोग का दायरा बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
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मोदी ने कहा कि ब्रिक्स सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचे का विकास किया गया है जिसमें अनिश्चितता की तरफ जाती दुनिया का विकास और स्थिरता शामिल है। आज हमारी कोशिश कृषि, संस्कृति, पर्यावरण, ऊर्जा, खेल और सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों का स्पर्श करना है। मोदी ने कहा कि हम गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कौशल, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, ऊर्जा और शिक्षा सुनिश्चित करने के मिशन मोड में हैं। हमारे महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम उत्पादकता को बढ़ा रहे हैं और महिलाओं को मुख्य धारा में ला रहे हैं।
बने ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी रेटिंग संस्थानों का मुकाबला करने और विकासशील देशों के सार्वभौमिक व कारपोरेट निकायों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि एक अलग रेटिंग एजेंसी ब्रिक्स सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के साथ उनके अन्य विकासशील देशों की भी मदद करेगी।
ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी के जल्द गठन की बात करते हुए मोदी ने कहा कि हमारे केंद्रीय बैंकों को निश्चित रूप से अपनी क्षमता बढ़ाना होगी। ब्रिक्स देशों के लिए इस तरह की एक एजेंसी के विचार को सबसे पहले भारत ने ही सामने रखा ताकि मूडीज, फिच और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जैसी पश्चिमी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के प्रभाव वाली वर्तमान व्यवस्था से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों की बाधाएं दूर की जा सकें।
दरअसल ये तीनों पश्चिमी रेटिंग एजेंसियां वर्तमान सार्वभौम रेटिंग बाजार के 90 प्रतिशत पर काबिज हैं। गत वर्ष गोवा में हुए ब्रिक्स शिकर सम्मेलन में भारतीय अधिकारियों ने आगे होकर मौजूदा क्रेडिट रेटिंग व्यवस्था की कमियों व एक वैकल्पिक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की जरूरत पर प्रकाश डाला था।