OBOR योजना का उद्घाटन समारोह, नवाज ने इशारों-इशारों में भारत को सुनाया
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चीन की राजधानी बीजिंग में रविवार को वन बेल्ट वन रोड़ इनिशिएटिव (ओबीओआर) योजना का उद्घघाटन समारोह किया गया। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तयीप इर्दोगेन समेत 29 देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए। वहीं योजना के तहत बनने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) को भारत ने अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया और बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) समिट में अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजकर बहिष्कार किया। भारत के विरोध पर नवाज शरीफ ने चुटकी लेने की भरसक कोशिश की। उन्होंने भारत पर इसका राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
समिट को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा, ‘अरबों डॉलर से बनने वाला सीपीईसी एक आर्थिक योजना है, जो क्षेत्र के सभी देशों के लिए खुला हुआ है। योजना का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे यह स्पष्ट करना चाहिए कि सीपीईसी क्षेत्र के सभी देशों के लिए आर्थिक रूप से वचनबद्ध है। इसकी कोई भी भौगोलिक सीमाएं नहीं हैं।’ नवाज ने आर्थिक गलियारा को ओबीओआर का जरूरी अंग करार दिया।
नवाज ने की शांति की बात
भारत का नाम लिए बगैर नवाज ने कहा कि यह समय मतभेदों को दूर करने, राजनीतिक कौशल के जरिए संघर्ष खत्म करने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए शांति की विरासत छोड़ने का है। नवाज ने यह भी कहा कि आर्थिक गलियारा का अर्थ भू-राजनीति से ऊपर उठकर भू-आर्थिक होना चाहिए। हम इसे उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ एक पथ के रूप में देखते हैं। हम सिर्फ आर्थिक समृद्धि के लिए इसका लाभ नहीं उठाना चाहते बल्कि शांति, कनेक्टिविटी और एक अच्छे पड़ोस का निर्माण करना चाहते हैं।
संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारतीय विरोध पर कुछ भी कहने से बचते दिखे। हालांकि उन्होंने फिर दोहराया कि सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सभी को एक दूसरे के विकास पथ और हितों का भी ध्यान रखना चाहिए। शी ने सिंधु और गंगा सभ्यताओं समेत दुनिया की विभिन्न सभ्यताओं के महत्व के बारे में बात करते हुए प्राचीन सिल्क रूट को दुनिया के लिए महत्वपूर्ण करार दिया।
प्रोजेक्ट ऑफ द सेंचुरी
चीन ने ओबीओआर इनिशिएटिव को ‘प्रोजेक्ट ऑफ द् सेंचुरी’ नाम दिया है। इसी के साथ राष्ट्रपति जिनपिंग ने योजना में 124 अरब डॉलर के निवेश के प्रति वचनबद्धता जताई। इसके अलावा उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक क्षमता और वित्तीय योजना पर 56 अरब डॉलर निवेश करने का वादा भी किया। चीन ने योजना में हिस्सा लेने वाले देशों के साथ मिलकर 50 संयुक्त प्रयोगशालाओं का निर्माण करने की बात भी कही है।
भारतीय विद्वान भी हुए शामिल
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाली सीपीईसी योजना के खिलाफ विरोध जताते हुए भारत ने भले ही अपना प्रतिनिधिमंडल चीन नहीं भेजा, लेकिन कुछ भारतीय विद्वान इस समिट का हिस्सा जरूर बने। इसके अलावा 29 देशों के राष्ट्राध्यक्षों समेत करीब 100 देशों के प्रतिनिधिमंडल ने इसमें हिस्सा लिया। समिट में हिस्सा लेने वालों में अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, रूस, जर्मनी और फ्रांस भी हैं।