सेना की पोशाक पहनकर भारत को चेता गए शी जिनपिंग
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डोकलाम सीमा पर भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं और इसी बीच चीन ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी के 90वें स्थापना दिवस के मौके पर आर्मी परेड निकाली गई। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सैनिक पोशाक में इस परेड में शामिल हुए और चीन की ताकत की हुंकार भरी। उन्होंने कहा कि घुसपैठ करने वाली ताकतों से निपटने के लिए चीन पूरी तरह तैयार है। चीन के उत्तरी प्रांत इनर मोंगोलिया में आयोजित परेड में 12 हजार सैनिकों ने हिस्सा लिया और कई अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया।
यह चीन के लिए दुनिया को ये बताने का मौका था कि उनके पास कौन-कौन से अत्याधुनिक हथियार हैं। उन्होंने मिसाइलों का खास तौर पर प्रदर्शन किया। इनमें परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइलें हैं। मोबाइल मिसाइलें हैं जिन्हें आप ट्रक में ले जाकर दूसरी जगह से चलवा सकते हो। इस दौरान सौ से ज्यादा एयरक्राफ्ट आसमान में घूम रहे थे। छह हजार से ज्यादा टैंक-तोपें और दूसरे हथियार परेड में पेश किए गए, जिनमें से रक्षा मंत्रालय के मुताबिक करीब आधे इससे पहले दिखाए नहीं गए थे।
जिनपिंग ने कहा कि पीएलए किसी भी घुसपैठिए को हरा सकता है। ये बयान ऐसे समय में आया है जब डोकलाम में भारतीय सैनिक तैनात हैं और दोनों सेनाओं के बीच आमने-सामने वाली स्थिति है। चीन मानता है कि भारत की फौज उनकी जमीन पर घुस गई है।
दूसरी तरफ उत्तर कोरिया ने मिसाइल छोड़ा है और उनका मिसाइल काफी मजबूत है। यहां तक कि अमेरिका भी इससे थोड़ा घबराया हुआ है। जिनपिंग ने इन दोनों ही घटनाओं का जिक्र नहीं किया। लेकिन उनकी बातों से लगा कि वो दुनिया और अपने सैनिकों को ये संकेत दे रहे थे कि हम पूरी तरह तैयार हैं और यहां तक कि सिर्फ अपनी सीमा पर नहीं, हम चीन के बाहर भी अपनी शक्ति दिखाएंगे।
क्योंकि जिनपिंग ने कहा कि दुनिया में अशांति बहुत है और शांति लाने के लिए दुनिया को चीन की जरूरत है। जिनपिंग ने कहा कि वो चीन का 'महान राष्ट्र' का सपना पूरा करके दिखाएंगे।
चीन के बारे में यह भी कहा जाता है कि उसका रक्षा बजट काफी है। लेकिन चीन यह कहता है कि अमेरिका के मुकाबले उसका रक्षा बजट काफी कम है। सवाल ये है कि आप रक्षा बजट का अंदाजा कैसे लगाएंगे। सेना के लिए जो रेलवे और सड़क जैसी चीजें बनाई जाती हैं, वे ऐसी दुर्गम पहाड़ी जगहों पर बनाई जाती हैं, जहां सेना के सिवा कोई नहीं जाता। उसको भी अगर आप रेलवे के बजट में गिनें, जहाज के बजट को भी सेना का बजट न मानें हैं तो जाहिर है कि सेना का बजट छोटा नजर आएगा। ऐसे देश में जहां संसद को रबर स्टैंप माना जाता है, जहां संसद सवाल नहीं पूछती है, वहां सरकार कुछ भी कर सकती है। ये बात दूसरे देशों में संभव नहीं है।