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राष्ट्रपति पद संभालते ही चीनी सेना से बोले शी-जिनपिंग, युद्ध के लिए रहें तैयार
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Fri, 27 Oct 2017 09:01 PM IST
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Xi jinping
चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग ने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करते ही देश की 2.3 मिलियन सेना को और मजबूत बनाने और युद्धों में किस तरह से जीत हासिल की जाए के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करने का आदेश दिया है। गुरुवार को सत्ता पर दुबारा काबिज होने के साथ ही शी ने सेना के टॉप अधिकारियों से बातचीत की। चीन में आर्मी को सत्ता का आधार और पावर बेस माना जाता है।
शी शक्तिशाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन और चीन मिलिट्री के मुखिया है जो एकमात्र आम नागरिक थे। इस मीटिंग में आर्मी के शीर्ष के अधिकारी मौजूद थे। सीएमसी ने बुधवार को नई लाइन-अप में 7 लोगों के सद्स्यों को शामिल किया गया है इससे पहले इसमें 11 सदस्य होते थे।
इससे पहले की रिपोर्टों में कहा गया थी की शी ने अपने पिछले कार्यकाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान भी चलाया था जिसमें दस लाख से अधिक अधिकारियों को सजा भी दी गई थी। वे तब पार्टी की सात सदस्यीय समीति को पांच में बदलना चाहते थे। शी के इसी विरोध में ऐसा माना जा रहा है कि शी के विरोध में कई आर्मी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं थे।
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पढ़ें: दोबारा ताजपोशी से पहले शी जिनपिंग ने सेना पर अपनी पकड़ की मजबूत
उल्लेखनीय है कि शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस सम्मेलन से कुछ दिन पहले पीएलए के शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल किया था और सत्ताधारी पार्टी के कांग्रेस से ठीक पहले दुनिया की सबसे बड़ी सेना में अपनी ताकत को और बढ़ाते हुए शी ने उसमें नए जनरलों की नियुक्ति की थी।
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शी शक्तिशाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन और चीन मिलिट्री के मुखिया है जो एकमात्र आम नागरिक थे। इस मीटिंग में आर्मी के शीर्ष के अधिकारी मौजूद थे। सीएमसी ने बुधवार को नई लाइन-अप में 7 लोगों के सद्स्यों को शामिल किया गया है इससे पहले इसमें 11 सदस्य होते थे।
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इससे पहले की रिपोर्टों में कहा गया थी की शी ने अपने पिछले कार्यकाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान भी चलाया था जिसमें दस लाख से अधिक अधिकारियों को सजा भी दी गई थी। वे तब पार्टी की सात सदस्यीय समीति को पांच में बदलना चाहते थे। शी के इसी विरोध में ऐसा माना जा रहा है कि शी के विरोध में कई आर्मी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं थे।
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उल्लेखनीय है कि शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस सम्मेलन से कुछ दिन पहले पीएलए के शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल किया था और सत्ताधारी पार्टी के कांग्रेस से ठीक पहले दुनिया की सबसे बड़ी सेना में अपनी ताकत को और बढ़ाते हुए शी ने उसमें नए जनरलों की नियुक्ति की थी।