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विकीलीक्स का दावा: CIA कर रहा था टीवी, कार और मोबाइल के जरिए जासूसी
amarujala.com, Presented By : अनंत पालीवाल
Updated Wed, 08 Mar 2017 05:32 PM IST
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विकीलीक्स ने मंगलवार को दावा किया कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी) कुछ इस तरह के सॉफ्टवेयर टूल्स का प्रयोग करके लोगों के स्मार्टफोन, कंप्यूटर और टीवी के जरिए जासूसी कर रही थी।
न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार विकीलीक्स ने कुल मिलाकर के 7818 वेब पेज जिनमें 943 डॉक्यूमेंट अटैच थे, वो जारी किए हैं। इन वेब पेज से पता चला है कि सीआईए ने करोड़ों कंप्यूटर के कोड अपने पास रखे हुए हैं, जिनके जरिए वो जासूसी कर रहा था।
सीआईए ने बाईपास किया कई मैसेजिंग सर्विस का Encryption
विकीलीक्स के मुताबिक, सीआईए और अन्य खुफिया इकाईयों ने कुछ इस तरह का सॉफ्टवेयर डेवलप किया था , जिसके जरिए कई पॉपुलर मैसेजिंग ऐप जैसे कि सिग्नल, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के इनक्रिपशन को बाईपास करके जानकारी पाई जा सकती थी। ये सारे हैकिंग एंड्रायड फोन पर किए गए हैं। विकीलीक्स ने कहा कि उसने यह सारे डॉक्यूमेंट जिनको वॉल्ट 7 नाम दिया गया है वो अमेरिकी सरकार के पुराने हैकर और कांट्रैक्टर के द्वारा जुटाए गए हैं।
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न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के अनुसार विकीलीक्स ने कुल मिलाकर के 7818 वेब पेज जिनमें 943 डॉक्यूमेंट अटैच थे, वो जारी किए हैं। इन वेब पेज से पता चला है कि सीआईए ने करोड़ों कंप्यूटर के कोड अपने पास रखे हुए हैं, जिनके जरिए वो जासूसी कर रहा था।
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सीआईए ने बाईपास किया कई मैसेजिंग सर्विस का Encryption
विकीलीक्स के मुताबिक, सीआईए और अन्य खुफिया इकाईयों ने कुछ इस तरह का सॉफ्टवेयर डेवलप किया था , जिसके जरिए कई पॉपुलर मैसेजिंग ऐप जैसे कि सिग्नल, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के इनक्रिपशन को बाईपास करके जानकारी पाई जा सकती थी। ये सारे हैकिंग एंड्रायड फोन पर किए गए हैं। विकीलीक्स ने कहा कि उसने यह सारे डॉक्यूमेंट जिनको वॉल्ट 7 नाम दिया गया है वो अमेरिकी सरकार के पुराने हैकर और कांट्रैक्टर के द्वारा जुटाए गए हैं।
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