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मिसाइल परीक्षण पर ट्रंप का जवाब, उत्तर कोरिया के ऊपर से बमवर्षक विमान उड़ाकर दी कड़ी चेतावनी

Mon, 18 Sep 2017 08:47 PM IST
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट Updated Mon, 18 Sep 2017 08:47 PM IST
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US flies fighter jets, bombers over Korean peninsula for drill
अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच जारी जुबानी जंग अब खतरनाक मोड़ लेती हुई दिख रही है। सोमवार को कोरियाई प्रायद्वीप के ऊपर से चार युद्धक और दो बमवर्षक अमेरिकी वमानों ने उड़ान भरी। इस अमेरिकी कार्रवाई को उत्तर कोरिया की ओर से हाल ही में किए गए परमाणु और मिसाइल परीक्षणों का जवाब माना जा रहा है।
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उत्तर कोरिया के साथ जब भी मतभेद बढ़ जाते हैं तो अमेरिका अक्सर अपने शक्तिशाली विमानों को भेजता है। दरअसल 3 सितंबर को उत्तर कोरिया ने अपना सबसे शक्तिशाली और छठा परमाणु परीक्षण किया था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर कुछ नए प्रतिबंध लगा दिए थे।
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इसके जवाब में उसने जापान पर मिसाइल छोड़ दिया था। अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाओं ने बताया कि सोमवार को उत्तर कोरियाई प्रायद्वीप पर से गुजरे विमानों में अमेरिकी सेना के दो बी-1बी बमवर्षक और चार एफ-35बी जबकि दक्षिण कोरिया के चार एफ-15के लड़ाकू विमान शामिल थे।
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वहीं अमेरिकी प्रशांत कमांड ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई विमानों ने साझा सैन्य अभ्यास किया। वहीं अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी द्वीप युशु के पास समुद्र के ऊपर जापानी लड़ाकू विमानों के साथ भी प्रशिक्षण किया।



पढ़ें: कैसे बना उत्तर कोरिया और क्यों शुरू हुआ अमेरिका से टकराव? जानिए सब कुछ

किम के आने के बाद बढ़ी परीक्षणों की संख्या
उत्तर कोरिया पर जिन परीक्षणों के कारण प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं दरअसल उनकी संख्या मौजूदा तानाशाह किम जोंग उन के 2011 में सत्ता में आने के बाद बढ़ी है।

हथियारों के बढ़ते परीक्षण को देखें तो जुलाई में ही उत्तर कोरिया ने दो अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया था। वहीं सितंबर में किया गया उसका परीक्षण अब तक का सबसे शक्तिशाली परीक्षण है।
 

अमेरिका की तबाही है किम का मकसद

US flies fighter jets, bombers over Korean peninsula for drill


संयुक्त राष्ट्र और विश्व शक्तियों की पाबंदियों से बेअसर होकर लगातार परीक्षण करने वाले उत्तर कोरिया का इरादा दरअसल बेहद ही खतरनाक है। विशेषज्ञों का मानना है कि किम ये परीक्षण तब तक नहीं रोकेगा जब तक की वह खुद को अमेरिका के किसी भी हिस्से में हमला करने के सक्षम नहीं बना लेता।

वहीं दक्षिण कोरियाई मीडिया ने शनिवार को कहा कि उत्तर कोरिया का मुख्य उद्देश्य खुद को अमेरिका के समानांतर स्थापित करना है ताकि अमेरिकी शासक उसके खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार न कर सकें। 

चीन की भूमिका अहम
उत्तर कोरिया और अमेरिका की लड़ाई में विश्व के आर्थिक-राजनीतिक परिदृश्य पर तेजी से उभर रहे चीन की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है।

दरअसल उत्तर कोरिया के साथ चीन 90 फीसदी व्यापार करता है और वहां भारी मात्रा में मुफ्त कच्चा तेल भेजता है। अमेरिका, चीन पर लगातार दबाव बना रहा है कि वह प्रतिबंधों को मानने के लिए उत्तर कोरिया को तैयार करे।

हालांकि चीन, उत्तर कोरिया के परीक्षणों से परेशान हो चुका है मगर वह उसे बर्बाद होते हुए नहीं देखना चाहता है। इसका कारण है कि यदि ऐसा होता है तो लाखों रिफ्यूजी चीन में घुस आएंगे और अमेरिका, उत्तर कोरिया पर कब्जा कर लेगा, जो कि चीन नहीं चाहता है।

 
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