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ट्रंप राज में गिर रहा है डॉलर, पिछड़ रहा अमेरिका का आर्थिक एजेंडा!

Sun, 13 Aug 2017 10:06 AM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Sun, 13 Aug 2017 10:06 AM IST
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InTrump government falling dollar Backward the economic agenda of the US
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी डॉलर में इस साल लगातार गिरावट दर्ज की गई है। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के मूल्य सूचकांक में लगभग 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट जनवरी माह के बाद देखी गई है। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनातनी के बीच शुक्रवार को डॉलर अपने निचले स्तर पर पहुंच गया। सूचकांक पिछले साल के मुकाबले थोड़ा ही गिरा है, लेकिन इसमें पिछले साल भी गिरावट दर्ज की गई थी।

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यूरो हुआ मजबूत
यूरोप की अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह एक अच्छी खबर है। साल 2014 में डॉलर के मुकाबले यूरो काफी कमजोर था। ऐसा तब हुआ था जब यूरोप के केंद्रीय बैंकों ने प्रोत्साहन नीति आपनाई थी, जबकि अमेरिका इससे दूरी बनाने लगा था। अब यूरोप की अर्थव्यवस्था सुधर रही है। इमैनुएल मैक्रों के चुनाव जीतने के बाद यूरो मजबूत हुआ है। यूरो का फायदा यह है कि डॉलर कमजोर हो रहा है। आज एक यूरो की कीमत 1.17 डॉलर से ज्यादा है, जो पिछले साल के मुकाबले दस सेंट अधिक है।

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पिछड़ रहा है ट्रंप का आर्थिक एजेंडा!

InTrump government falling dollar Backward the economic agenda of the US
डॉलर में गिरावट - फोटो : बीबीसी

यह सिर्फ यूरो की कहानी नहीं है। डॉलर अन्य देशों की मुद्राएं, जैसे जापान के येन, मैक्सिको की पेसो और स्वीडेन के क्रोना के आगे भी कमजोर हो रहा है। इतना ही नहीं, ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटिश पॉन्ड भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। साल 2016 के अंतिम महीनों में डॉलर काफी मजबूत था। टैक्स में कटौती और बुनियादी ढांचे में निवेश की उम्मीदों के बाद ऐसा लगा था कि डॉलर की मांग बढ़ेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

अब ऐसा लग रहा है कि ट्रंप का आर्थिक एजेंडा पिछड़ रहा है। अमेरिकी चुनाव में रूस के कथित हस्ताक्षेप की चल रही पड़ताल ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी है। दूसरी तरफ इस सप्ताह उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच तनातनी भी बढ़ी है।

उच्च ब्याज दर मजबूत अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है। उच्च दरें निवेश को बढ़ावा देती है। लेकिन अभी ब्याज दरें अभी काफी कम है। फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष जनेट येलेन ने हाल ही में कहा था कि भविष्य में बेहतरी के आसार दिख रहे हैं लेकिन ब्याज दरें फिर भी कम रहेगी।

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